ओ माता-पिता तुझे वंदन,मैने किस्मत से तुम्हे पाया, माता-पिता की सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं-समकित मुनिजी

  • मां बाप की कद्र नहीं कर रहे हो तो पशु और हमारे में कोई अंतर नहीं
  • श्रवणकुमार कथा के दूसरे दिन मातृ पितृ भक्ति प्रसंगों से भावुक हुए श्रावक-श्राविकाएं

उदयपुर 4 मार्च (निलेश कांठेड़)। मुझे इस दुनिया मे लाया, मुझे बोलना चलना सिखाया, ओ माता-पिता तुझे वंदन,मैने किस्मत से तुम्हे पाया। माता-पिता के असीम उपकार हम पर है लेकिन दिन-रात भागती दुनिया में खुद के लिए वक्त नहीं है। हर खुशी है लोगों के दामन में पर हंसने के लिए वक्त नहीं है। मां की लोरी का एहसास तो है पर मां को मां कहने का वक्त नहीं है। सारे रिश्तो को मार चुके पर दफनाने का वक्त नहीं। ये विचार श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाशजी म.सा. के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने शनिवार रात उदयपुर के हिरणमगरी सेक्टर-4 स्थानक में श्रीवर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संस्थान श्रमण संघ परिषद के ततवावधान में मातृ-पितृ भक्ति का संदेश देने वाले तीन दिवसीय विशेष प्रवचन ‘‘कथा श्रवण की’’ आयोजन के दूसरे दिन व्यक्त किए। पूज्य समकित मुनिजी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में मां को देव की उपाधि दी गई है वह मातृ देवो भवे कहा गया है।
माता पिता का सम्मान हमारा पहला कर्तव्य है। माता-पिता अपने पास कुछ नहीं हो फिर भी बच्चों की सब अभिलाषा पूरी करने का प्रयास करते हैं। किस्मत वाले हैं वह जिन्हें माता-पिता की छत्र मिलती है। कृपा मिलने के बाद मां बाप की कद्र नहीं कर रहे हो तो पशु और हमारे में कोई अंतर नहीं है। इंसान को माता-पिता की दौलत याद रहती है लेकिन उनके प्रति सेवा का दायित्व भूल जाते हैं। माता-पिता को साता नहीं पहुचा सकते, सेवा नहीं कर सकते कोई बात नहीं लेकिन कम से कम उनको सताओ तो मत।
रिश्तों पर टिकी होती जिंदगी, ले जा सकते स्वर्ग-नरक तक
पूज्य समकित मुनिजी ने रिश्तों का महत्व समझाते हुए कहा कि बड़े बुजुर्गों के प्रति सत्कार व सम्मान का भाव होता है तो घर परिवार में शांति का वातावरण बनता है। रिश्तो में समरसता आती है। रिश्ते स्वर्ग तक भी ले जाते हैं और नर्क तक भी ले जाते हैं। कोई रिश्तेदार ऐसे मिल जाते हैं जिंदगी बर्बाद कर देते हैं तो कभी-कभी ऐसे भी रिश्ते मिल जाते हैं बर्बाद हो चुकी जिंदगी को आबाद कर जाते है। रिश्तो पर जिंदगी टिकी होती है। उन्होंने कहा कि सौभाग्यशाली होते हैं जिन्हें सही रिश्तेदार मिल जाते हैं, दुर्भाग्य उन लोगों का जो सही रिश्तेदार मिलने पर उन्हें संभाल नहीं पाते हैं। श्रवण कुमार की कथा ऐसे ही रिश्तो की चर्चा है। यह कथा बताती है कैसे रिश्ते एक दूसरे को संभाल लेते हैं। कैसे रिश्ते बिगड़े काम बना देते हैं।रिश्ते स्वर्ग नरक में नहीं केवल मानव जीवन में है। इंसान का सबसे पहला रिश्ता मां-बाप से जुड़ता है। मां से तो रिश्ता इतना गहरा होता है कि गर्भ काल से लेकर बच्चे के समझदार होने तक मां लालन-पालन की जिम्मेदारी संभालती है।
गीतों से दिया माता-पिता की सेवा का सन्देश
श्रवण कुमार की कथा के दौरान पूज्य समकित मुनिजी की मधुर वाणी में मातृ पितृ भक्ति का सन्देश देने वाले गीतों की प्रस्तुति ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।उन्होंने मां का आशीर्वाद जग में चारों धाम से न्यारा है, मुझे इस दुनिया में लाया मुझे बोलना चलना सिखाया, तू कितनी अच्छी है तू कितनी भोली है प्यारी प्यारी है मां ओ मां आदि गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुति दी तो कई नयन नम दिखे। शुरू में पूज्य जयवन्त मुनिजी ने गीत माता पिता प्रभु गुरु चरणों में प्रणवत बारंबार हम पर किया बड़ा उपकार की प्रस्तुति देकर माहौल को भावनामय बना दिया। पूज्य भवान्त मुनिजी का भी सानिध्य रहा। कथा श्रवण की सुनने के लिए समाज के हर उम्र-वर्ग के सैकड़ो श्रावक-श्राविकाएं पहुंचे थे। कथा श्रवण की आयोजन का समापन रविवार रात 8 बजे से होंगा।

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