बड़ीसादड़ी (सुनील मेहता “कान्हा”) । जैन दिवाकर प्रवचन हॉल में होली चातुर्मास पर आयोजित धर्मसभा में श्रमण संघीय उपप्रवर्तनीय महासती शान्ता कुँवर ने फरमाया कि आज तुम ज्ञान ,दर्शनओर चरित्र को छोड़ कर व्यसन ,फैशन और टेंशन में उलझ गए हो। अर्थात आज का मानव चिंतन को छोड़कर चिंता में रहने लगा है। इन व्यसन ,फैशन और टेंशन में उलझ कर अमूल्य जीवन को बर्बाद कर रहा है। भगवान की भक्ति और भजन को छोड़ रहा है।
आगे कहा कि दिन रात के पूरे 1440 मिनट हम रोजाना ही व्यसन, फैशन और टेंशन में उलझ कर बर्बाद कर रहे हैं । पूरे दिन में हम मात्र 48 मिनट भी आत्म साधना के लिए नहीं निकाल पा रहे हैं। अर्थात दिन की एक सामाजिक भी धारण नहीं कर पा रहे हैं ,स्वयं की आत्मा को नहीं देख पा रहे हैं। आगे कहा कि दिखावे की भक्ति कभी तारने वाली नहीं है भक्ति करनी हो तो मीराबाई, शबरी, हनुमान, गौतम स्वामी ओर महासती चंदनबाला जैसी करें । मीरा ने कृष्ण की भक्ति में जहर पी लिया तो भी उसका बाल भी बांका नहीं हुआ। प्रभु राम ने शबरी के झुठे बेर भी प्रेम से खा लिए ।
चंदनबाला के हाथों प्रभु महावीर ने उड़द के बाकुलो से ही पारणा कर लिया।अर्थात ऐसी भक्ति ही हमारा कल्याण कर सकती है।
आगे कहा कि गुरुदेव जैन दिवाकर ने चलती हुई ट्रेन को रोक दी।अम्बल का गुड़ बना दिया। राजा महाराजाओं को अहिंसा का पाठ पढ़ाया। एवं उनके चरणामृत से कहीं रोगियों के रोग दूर हो गए। उनकी बोली मैं जादू था ओर वाणी से मानो अमृत बरस रहा हो । हजारो वर्षों में कभी ऐसे साधु होते हैं।
साध्वी मंगलप्रभा एवं साध्वी नयनप्रभा ने भी विचार रखे।
पदाधिकारियों ने लिए प्रवचन लाभ- जैन दिवाकर संगठन समिति के अध्यक्ष शांतिलाल मारु एवं महामंत्री सिद्धराज सिंघवी आदि पदाधिकारीयो ने महासती शान्ता कुँवर आदि ठाणा के प्रवचन एवं दर्शनों का लाभ लिया। एवं अपने उध्बोधन के माध्यम से जैन दिवाकर संगठन समिति के आजीवन सदस्य बनने के लिए सब को प्रेरित किया। एवं नीमच में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन के लिए सब को निमंत्रण दिया। प्रभावना दिलीप कुमार सिद्धार्थ कुमार मोगरा परिवार की ओर से वितरित की गई।