सिद्धत्व के लिए भाव परिग्रह से मुक्त होना आवश्यक-प्रवर्तकश्री
रतलाम28 अप्रैल। मालव केसरी, महाराष्ट्र विभूषण, श्रमण संघ प्रणेता, प्रसिद्ध वक्ता गुरूदेव 1008 श्री सौभाग्यमलजी मसा की मासिक जयंती शुक्रवार को मनाई गई। नोलाईपुरा स्थित श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल स्थानक में इस मौके पर श्रमण संघीय प्रवर्तक श्री प्रकाशमुनिजी मसा की निश्रा में जाप किए गए। जाप के बाद प्रवचन में प्रवर्तकश्री ने भाव के परिग्रह से मुक्त होने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि भावों के परिग्रह से मुक्त हुए बिना सिद्धत्व प्राप्त नहीं किया जा सकता। मालव केसरी गुरूदेव द्वारा बताए गए मार्गों पर चलकर सभी सिद्धत्व प्राप्त करने का प्रयास करें।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि साधु-संत भी यदि समाज के प्रति कल्याण की भावना रखते है, तो यह उनका भावों के प्रति परिग्रह है। इससे मुक्त हुए बिना संयम जीवन सार्थक नहीं होता है, क्यांेकि जो साधने के लिए व्यक्ति संयम लेता है, उसे साधने के बजाए वह उसमें लगा रहता है, जो कभ सधता नहीं है। संसार में क्रोध, लोभ, मान, माया आदि कषायों से मुक्ति नहीं मिलती, जब तक साधुत्व सफल नहीं होता और साधुत्व के बाद यदि भावों से मुक्ति नहीं मिले, तो सिद्धत्व नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि साधु भी जब संबंधों के साथ रहते है, तो मानना चाहिए कि उनमें वैराग्य नहीं आया। वैराग्य में व्यक्ति भावों को महत्वहीन कर देता है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि शून्य की कीमत बहुत है, लेकिन वह उसे तभी मिलती है, जब उसे अंक से साथ जोडा जाता है। अंक नहीं हो, तो शून्य महत्वपूर्ण नहीं रहता, लेकिन जब अंक से साथ जुडकर वह उसका महत्व भी बढा देता है। नकली का महत्व भी तब तक है, जब तक असली मिलता है, इसलिए मिथ्या बातों में पडने के बजाए आत्मबल को मजबूत करे और संसार के परिग्रहों से मुक्त होने का प्रयास करे। परिग्रहों का त्याग ही आत्म कल्याण का सरल और सहज मार्ग है।
प्रवर्तकश्री से रतलाम में रूकने की विनंती
प्रवचन के दौरान श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने प्रवर्तकश्री एवं महासतीजी आदि ठाणा से रतलाम में अधिक से अधिक रूकने की विनती की। इस दौरान पंडित रत्न श्री महेन्द्र मुनिजी मसा, श्री दर्शनमुनिजी मसा, श्री अभिनंदन मुनि जी मसा और महासती श्री चंदनबाला जी मसा, श्री रमणीक कुंवर रंजन जी मसा, श्री कल्पनाश्रीजी मसा, श्री चंदना जी मसा, श्री लाभोदया जी मसा, श्री जिज्ञासा जी मसा आदि ठाणा उपस्थित रहे। जाप की प्रभावना का वितरण डाडमबाई-सुजानमल, बाबूलाल मेहता परिवार ने किया। प्रवचन के बाद बाबूलालजी की स्मृति में प्रेमलता श्रीमाल परिवार द्वारा प्रभावना वितरीत की गई।