जावरा (अभय सुराणा) । श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ जावरा की गोरवशाली परंपरा के अनुसार प्रात: स्मरणीय जैन दिवाकर चौथमलजी म.सा.के प्रति माह सुदि तेरस के जाप दिवाकर भवन पर आयोजित किये जाते हैं जाप की श्रृखंला में वैशाख सुदी तेरस के जाप आचार्य श्री विजयराज जी महाराज सा. की आज्ञानुवर्ती प्रवचनकार महासती श्री ख्यातिश्री जी म.सा. तपस्वी महासती श्री मीनाक्षीश्री जी म.सा. विद्या अभिलाषी महासती श्री गुप्तिश्री जी म.सा. ठाणा 3 के पावन सानिध्य मे सम्पन्न हुए। जिसमे अनेक श्रावक श्राविकाओ ने आस्था एवं उत्साह के साथ भाग लिया।धर्मसभा को संबोधित करते हुए महासती ने फरमाया कि धर्म एक ही है लेकिन धर्म करने वालो का दृष्टिकोण अलग अलग है कोई आत्मकल्याण के लिए तो कोई मान प्रतिष्ठा हेतु किसी को पैतृक धरोहर के रुप मे करता है। एक शुद्ध सामायिक भी मन से की जावे तो परमात्मा से मिला सकती है। धर्म वाणी में शीतलता क्रोध है क्षमा की क्षमता प्रदान करता है धर्म हमें न आस्तिक बनाता है और ना नास्तिक बनाता है,धर्म तो हमें वास्तविक बनाता है। फूल एक डाली पर खिलता है लेकिन उसकी महक चारों तरफ फैलती है ऐसे ही हमारे गुरूदेव प्रसिद्ध वक्ता जैन दिवाकर श्री चौथमलजी म.सा.थे, जिन नही पर जिन सरीखे ,वचन सिद्ध थे।आजीवन जिन्होंने श्रमण संघ में कोई पद न लेते हुए धर्म का परचम फहराया आज श्रमण संघ उनके नाम से जाना जाता है उनके कई चमत्कार के किस्से प्रचलित है जो श्रावको ने स्वयं अनुभव किए हैं।उपरोक्त जानकारी देते हुए श्रीसंघ अध्यक्ष इंदरमल दुकड़िया एवं कार्यवाहक अध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि वैशाख सुदी तेरस के जाप के लाभार्थी श्रीमान बसंतीलाल जी रुपेश जी चपडोद परिवार रहे एवं प्रवचन की प्रभावना का लाभ श्रीमान ललितकुमारजी शांतिलालजी भंडारी परिवार ने प्राप्त किया।धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया आभार उपाध्यक्ष विनोद ओस्तवाल ने माना।