

झुमरीतिलैया। दिगंबर जैन समाज के सानिध्य में जैन संत परम पूज्य मुनि श्री 108 निर्वेगसागर जी मुनिराज ,108 मुनि शीतल सागर जी मुनिराज के मंगल आशीर्वाद से जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर देवाधिदेव 1008 श्री शांतिनाथ भगवान का निर्वाण महोत्सव आज ज्येष्ट कृष्ण चतुर्दशी को बहुत ही धूमधाम से श्री दिगंबर जैन दोनों मंदिर में मनाया गया जिसमें प्रातः श्री दिगंबर जैन बड़े मंदिर जी में शांति नाथ वेदी में आज देवाधिदेव 1008 शांति नाथ भगवान के जन्म तप मोक्ष कल्याणक दिवस पर विशेष प्रथम कलश एवं शांति धारा श्री अजय कुमार जी अमित जी गंगवाल, श्री सुरेन्द्र जी सौरभ जी काला निर्वाण लाडू, श्री कैलाश जी, कमल जी, मनीष जी गंगवाल, इसके साथ ही आज मोक्ष कल्याणक पर्व के अवसर पर निर्वाण लड्डू समाज के कैलाश कमल मनीष गंगवाल ने श्री जी के चरणों मे चढ़ाया,ज्ञात हो कि आज से कई हज़ार वर्ष पहले आप की पवित्र आत्मा जो जम्बूद्वीप के भरतक्षेत्र के आर्यखंड के भारत देश के उत्तराखंड राज्य के श्री हस्तिनापुर जन्मे ओर तीर्थो के राजा तीर्थराज सम्मेदशिखर जी पर्वत के कुन्दप्रभ कूट से निर्वाण को प्राप्त किये थे तभी से पूरे विश्व मे निर्वाण महोत्सव के रूप में मनाया जा रहा है,इस अवसर पर मुनि श्री 108 निर्वेगसागर जी मुनिराज ने अपनी प्रवचन श्रखला में बताया किजीवन को सुंदर कैसे बनाए।
आप अपने जीवन मे कुछ ना कुछ नियम जरूर लीजिए और मन को धर्म मे लगाइए, 60 साल के बाद तो एक समय भोजन और शाम को फलाहार लेकर अपने जीवन को स्वस्थ बनाइये और धर्म मे लगाइए ।ओर बच्चे को शुरू से ही नियम संयम का पाठ पढ़ाना चाइये जिससे आगे जाकर अपने जीवन मे संयम पालन कर अपने जीवन को उत्तम बना सके। समाज के मंत्री ललित सेठी के साथ सेकड़ो लोग उपस्थित थे।साथ ही आज कोडरमा से आये पत्रकार राज अजमेरा,संजय गंगवाल के साथ दिल्ली से आये अर्हम योग के प्रशिक्षक एडवोकेट अजय जैन ने आचार्य श्री 108 विद्या सागर जो महामुनिराज के शिष्य के सानिध्य में सम्मेदशिखर के शांतिनाथ भगवान के निर्वाण स्थली कुन्दप्रभ टूक पर निर्वाण लड्डू चढ़ाया। कोडरमा मीडिया प्रभारी जैन राज अजमेरा,नविन जैन ने उक्त जानकारी दी।