बनना है तो रेस का घोड़ा बनो, जंगल, सर्कस और जुलूस का नहीं – आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा

प्रभु के वचन पर श्रद्धा रखो, जीवन बदल जाएगा – मुनिराज ज्ञानबोधी विजयजी म.सा.

रतलाम, 30 जून। श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ गुजराती उपाश्रय, श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वेताम्बर तीर्थ पेढ़ी रतलाम के तत्वावधान में आयोजित सैलाना वालों की हवेली, मोहन टॉकीज में आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा एवं उनके शिष्य मुनिराज ज्ञानबोधी विजयजी म.सा. के प्रवचन जारी है। इसमें शुक्रवार को मानव जीवन की सफलता के मंत्र बताए गए।
आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा ने चार प्रकार के घोड़ों का अलग-अलग महत्व बताया और कहा कि यदि बनना है तो रेस का घोड़ा बनो, जंगल, सर्कस और जुलूस का नहीं। रेस का घोड़ा हमेशा चलता है। जंगल के घोड़े पर कोई नियंत्रण नहीं होता, कुछ लोग भी ठीक इसी तरह के होते हैं। सर्कस का घोड़ा रिंग मास्टर के हाथ में चाबूक देख घूमता है और जुलूस का घोड़ा सिर्फ बैंड की आवाज पर चलता है, उसके बंद होते ही वह रुक जाता है। इसलिए कहता हूं कि रेस का घोड़ा बनो। रेस का घोड़ा ही जीवन में सफलताएं प्राप्त कर सकता है।
आचार्य श्री के शिष्य मुनिराज ज्ञानबोधी विजयजी म.सा. ने कहा की प्रभु के वचन पर श्रद्धा रखो। इससे जीवन परिवर्तित हो जाएगा। जिस तरह से आप ट्रेन और कार में सवार होकर चालक पर भरोसा करते हो कि वह आप को गंतव्य तक पहुंचा देगा, ठीक उसी तरह प्रभु पर श्रद्धा रखने से जीवन बदलेगा। यदि आप गुरु-भगवंत के उपदेश निरंतर श्रवण करेंगे तो मन भी बदल जाएगा।
मुनिराज ने कहा कि अग्नि के नजदीक जाते ही मोम पिघल जाता, लाख अपना स्वरूप बदल लेता है और ठंडा होने फिर से ठोस हो जाता है लकड़ी आग में जाकर उसमें समर्पित हो जाती है। उसी प्रकार यदि जीव गुरुदेव के प्रति समर्पित होता है तो उसका जीवन परिवर्तित हो जाता है।
रविवार को होंगे विशेष प्रवचन
आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. के मुखारविंद से रविवार, 2 जुलाई को प्रातः 9:00 से 10:30 बजे तक विशेष प्रवचन होंगे। प्रवचन का विषय माय 5 टारगेट रहेगा। श्री संघ ने धर्मालुजनों से प्रवचन में समय पर उपस्थित होकर धर्म लाभ लेने की अपील की है।