श्रीसंघ द्वारा तपस्वी श्रेणिक जी कटारिया बहुमान किया गया

रतलाम 11 जुलाई। नीमचौक स्थानक में निद्राविजेता तपस्वीराज परमपूज्य गुरुदेव श्री लाभमुनिजी म.सा. के सुशिष्य तप-केसरी, मानवता के प्रणेता, नवकार मंत्र आराधक, उप प्रवर्तक परम पूज्य श्री अरुण मुनि जी म.सा. आदि ठाणा 02 के सानिध्य में ज्ञान ध्यान प्रवचन की गंगा बह रही है।
पूज्य गुरुदेव श्री अरुणमुनि जी ने नीमचौक स्थानक की महती धर्मसभा में सच्ची मित्रता के बारे फरमाया की सच्चा मित्र वो होता है की जब मुसीबत एंव गरीबी में सब साथ छोड़ देते है, तब हाथ थामता है, संभालता है, दुर्व्यसनों से बचाता है और गलत मार्ग पर जाने से रोकता है। सच्ची मित्रता लोटे और डोरी के समान होती है। लोटा डोरी पर विश्वास कर 300 फीट गहरे अंधेरे कुए में आकर पानी लेकर आता है अर्थात मित्र खुद भले ही मुसीबत में फँस जाए लेकिन अपने मित्र को आँच नही आने देता है। पूज्य गुरुदेव की प्रेरणा से चातुर्मासकाल में प्रतिदिन 12 घण्टे (प्रातः 07 से साँय 07) के नवकार महामंत्र के अखंड जाप नीमचौक स्थानक पर आयोजित किये जा रहे है। जिसमें बड़ी संख्या में धर्मालु समाजजन सहभागिता कर रहे है। संघ के महामन्त्री विनोद बाफना ने बताया की प्रवचन के दौरान प्रतिदिन मसा द्वारा आगम पर आधारित 4 प्रश्न पूछे जाते है ।
संघ उपाध्यक्ष अजय खमेसरा ने बताया की संघ के वरिष्ठ सुश्रावक श्री श्रेणिक जी कटारिया ने इस चातुर्मास काल में पहली बड़ी तपस्या 9 उपवास की पूर्णाहुति की। इस अवसर पर श्रीसंघ की और से तपस्वी का बहुमान किया गया। इस अवसर पर प्रेमकुमार मोगरा, महेंद्र बोथरा, प्रकाश रांका, छोटू भाई गाँधी, सुरेंद्र मेहता, बी एल मेहता, गुणवंत मालवी, मनीष भटेवरा, पारस मेहता आदि समाज जन उपस्थित थे। धर्मसभा का संचालन विनोद बाफना ने किया।