- दिनचर्या व्यवस्थित कर उसमें धर्म आराधना का भी समय तय करें
- आदिनाथ सोसायटी के पारख सभा मण्डप में नियमित प्रवचनमाला

पूना 11 जुलाई (निलेश कांठेड़)। स्वयं धर्म आराधना करते है अच्छी बात है लेकिन जब तक पूरे परिवार को इससे नहीं जोड़ेेंगे सार्थक परिणाम नहीं आएंगे। परिवार में जो अधर्मी है उन्हें धर्मी बना दो नहीं तो ऐसा नहीं हो कि वह तुम्हे अधर्मी बना दे। परिवार की बहुओं और बच्चों को धर्म व जिनवाणी श्रवण से जोड़ दिया तो परिवार का माहौल तनावरहित हो जाएगा। बुढ़ापे में आनंद से टेंशन फ्री लाइफ आप जी सकेंगे। ये विचार श्रमणसंघीय सलाहकार सुमतिप्रकाश महारासा के सुशिष्य आगमज्ञाता प्रज्ञामहर्षि श्री डॉ. समकितमुनिजी म.सा. ने मंगलवार को पुण्यनगरी पूना के आदिनाथ सोसायटी जैन स्थानक भवन ट्रस्ट के तत्वावधान में पारख सभा मण्डप में आयोजित नियमित प्रवचनमाला ‘‘कहानी द्रोपदी की,कहानी कर्म की’’ के तहत व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि एक दिन आज भी 24 घंटे का ही है कोई कम ज्यादा नहीं हुआ है लेकिन अपनी अस्त-व्यस्त जिंदगी के कारण हम समय नहीं होने का राग अलापते रहते है। हमारा न सोने का टाइम फिक्स है न उठने का समय तय है। जब सुबह उठेंगे ही 8-9 बजे तो फिर टाइम शॉर्ट होंगा ही। समकितमुनिजी ने समय प्रबंधन की सीख देते हुए कहा कि हमारे उठने और सोने का समय तय हो ओर अपनी दिनचर्या तय कर उसे फॉलो करे। इसमें कम से कम घंटा प्रतिदिन सामायिक-धर्मसाधना के लिए भी तय रखे ओर यथासंभव उस समय कोई दूसरा कार्य नहीं हो। कभी सामायिक-स्वाध्याय मिस हो जाए तो हमे उसका भी अफसोस होना चाहिए। मुनिश्री ने कहा कि पूरे परिवार को धर्म के साथ जोड़ने के लिए हमे एक-दूसरे को कार्य में सहयोग करना होगा ताकि किसी को भी जिनवाणी श्रवण के लिए आने में समय की कमी या कार्य का बोझ महसूस नहीं हो। परिवार के जो सदस्य अब तक धर्म से नहीं जुड़े है उन्हें प्रेरणा देकर इससे जोड़ने का प्रयास करें। धर्मसभा के शुरू में गायनकुशल जयवंतमुनिजी म.सा. ने गीत ‘जब से मिली शरण की मेरे पाप धुल गए’ प्रस्तुत कर माहौल भक्तिपूर्ण बना दिया। धर्मसभा में पूज्य प्रेरणाकुशल भवान्तमुनिजी म.सा.,सरलमना श्री विजयमुनिजी म.सा., सेवाभावी श्री भूषणमुनिजी म.सा. का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में पूना के विभिन्न क्षेत्रों से आए हजारों श्रावक-श्राविकाएं मौजूद थे। आकुर्डी श्रीसंघ ने वर्ष 2024 के चातुर्मास की विनती भी समकितमुनिजी के श्रीचरणों में प्रस्तुत की। धर्मसभा का संचालन आदिनाथ स्थानकवासी जैन भवन ट्रस्ट पूना के अध्यक्ष सचिन रमेशचन्द्र टाटीया ने किया। प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.45 से 9.45 बजे तक होगा।
भीलवाड़ा में एक परिवार ने पेश की शादी की अनुकरणीय मिसाल
पूज्य समकितमुनिजी म.सा. ने शादियों के नाम पर दिखावे व प्रदर्शन की प्रवृति से बचने की प्रेरणा देते हुए कहा कि आजकल पूना के आसपास के क्षेत्रवासी पूना में आकर शादी करते है ओर यहां के धनाढ्य वर्ग की इच्छा कहीं ओर जाकर शादी करने की रहती। पीछे मूल भावना यहीं रहती मुझे दिखाना है। प्रदर्शन की ऐसी होड़ लगी है कि पता नहीं व्यक्ति कहां जाकर थमेगा। उन्होंने भीलवाड़ा के एक प्रतिष्ठित परिवार की चर्चा करते हुए कहा कि आप यह जानकार ताजुज्ब करोंगे कि हर वर्ष करोड़ो रूपए जीवदया के लिए देने वाले हजारों करोड़ो की संपदा वाले उस परिवार ने अनुकरणीय मिसाल पेश करते हुए अपने पुत्र की शादी एक गौशाला में जाकर की। ये ऐसा परिवार है जिसके बारे में कहा जाता है उसके यहां से कोई खाली हाथ नहीं लौटता। उन्होंने कहा कि बड़े लोग जो करते है पीछे के लोग उनका अनुसरण करने का प्रयास करते है। यदि सम्पन्न वर्ग सुधर जाए तो मिडिल क्लास स्वतः आगे बढ़ जाएगा। मिडिल क्लास की मजबूरी ऐसी हो जाती है कि उसको कर्जा लेकर भी शादियों में दिखावा करना पड़ता है।
तपस्वियों की अनुमोदना बारम्बार
पुण्यनगरी पूना में पूज्य समकितमुनिजी म.सा. के सानिध्य में तपस्या की होड़ लगी है। धर्मसभा में मंगलवार को उस समय ‘अनुमोदना-अनुमोदना बारम्बार’ के जयकारे गूंज उठे जब सुश्राविका वैभवी दीपक दरड़ा ने 11 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। उनकी अनुमोदना में एक बालिका ने भी उपवास का प्रत्याख्यान लिया। श्रीसंघ की ओर से भी उनका सम्मान किया गया। मासखमण के प्रत्याख्यान ले चुके सुश्रावक वर्धमान कोठारी के 11 उपवास की तपस्या रही। पूज्य समकितमुनिजी ने तपस्वियों की अनुमोदना करते हुए उनके प्रति मंगलभावनाएं व्यक्त की। पुण्यकलश आराधना कर रहे करीब 150 तपस्वियों के बियासना रहा।
चातुर्मास में 14 जुलाई को मनाया जाएगा सास-बहू दिवस
चातुर्मास के तहत आत्मकल्याण के लक्ष्य से सर्वोतभद्र चौमुखी जाप आयोजन भी प्रतिदिन रात 8.30 से 9.30 बजे तक हो रहा है। इसमें भी प्रतिदिन आदिनाथ सोसायटी सहित पूना महानगर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रावक-श्राविकाएं भाग लेेकर पुर्ण्याजन कर रहे है। चातुर्मास में 14 जुलाई शुक्रवार को सास-बहू दिवस मनाया जाएगा। इसमें सास-बहूं को जोड़े से प्रवचन में आना होगा ओर विषय रहेगा ‘काश मेरी सास भी ऐसी होती’। चातुर्मास के तहत 8 से 13 वर्ष के बच्चों के लिए सप्त कुव्यसन त्याग शिविर का आयोजन भी 16 जुलाई को दोपहर 2.30 से 4 बजे तक किया जाएगा। शिविर के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा।