जिस घर में वात्सल्य और विश्वास हो वहां धर्म जाग्रत है शासन दीपक आदित्य मुनि म सा

रतलाम। राम महिमा महोत्सव चातुर्मास के अंतर्गत शासन दीपक आदित्य मुनि जी महाराज साहब ने फरमाया सबसे बड़ी तपस्या स्वार्थ को त्यागना है जो लोग स्वार्थ का त्याग करते हैं वहां मोह,शील का त्याग स्वयं ही हो जाता है आप घर में बच्चों पर वात्सल्य की वर्षा करें उनके कार्यों को विश्वास के साथ आगे बढ़ाएं तो वह भी आपके साथ पूरे विश्वास से खुले मन से सारी बातें शेयर करेंगे। वर्तमान परिस्थिति में दादा दादी से दूर होकर संस्कारों की प्रीत की वात्सल्य कि अनुभव की शिक्षा की कमी से नई पीढ़ी गलत मार्ग पर भटक रही है इसलिए माता पिता का कर्तव्य है कि दोनों पीढ़ी के बीज पुल का काम करते हुए उन्हें साथ रखें व बच्चों की संगत शिक्षा मित्र भोजन इच्छाएं आदि चीजों का ध्यान रखें। नई पीढ़ी को इतना सुदृढ़ बनाएं की सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करें, पुराने समय में भारतीय संस्कृति अनुसार ज्वाइन फैमिली हुआ करती थी जहां पर सभी प्रकार के लोग थे वह अलग अलग शिक्षाएं बच्चों को देते थे । संत बच्चों को पचखाणो में बांधने की कोशिश इसलिए करते हैं कि वह छोटे-छोटे नियमों से बंद कर सही मार्ग पर निकले, गलत रास्ते की और ना जाए सुसाइड ना करें ,चोरी ना करें ,व्यसन की और ना जाए, अपने घर के सिद्धांत व संस्कार ना भूले, समाज का ध्यान रखें और एक आदर्श व्यक्तित्व बने इसलिए हमें आज की पीढ़ी को वात्सल्य व विश्वास के साथ पालना जरूरी है उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री साधुमार्गी जैन संघ के प्रीतेश गादीया ने बताया कि म सा के प्रवचन में युवाओं का ताता लगा हुआ है वह कई हुआ त्याग प्रत्याशियों के साथ-साथ तपस्या की और भी आगे बढ़ रहे हैं तपस्या से जीवन। में आसक्ति कम होती है उसी और युवा आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे हैं संघ अध्यक्ष सुदर्शन जी पीरोदिया मंत्री दशरथ बाफना ने सभा का संचालन किया।