आत्मा से शरीर का संबंध इस जन्म का है लेकिन कर्म और आत्मा का संबंध जन्म जन्मांतर से है – राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश

इंदौर महावीर भवन 25 जुलाई 2023 । हमारे ऊपर आने वाले संकट विपत्ति के लिए अपने कृत कर्म पर ध्यान देने के बजाय भगवान को दोषी ठहराना आत्मा और परमात्मा के साथ सरासर अन्याय है। उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने संबोधित करते कहा कि मानव अपने शुभाशुभ कर्मों के आधार पर ही अपने भाग्य और नसीब का निर्माता करता है ईश्वर का हस्ताक्षर नहीं होता।
उन्होंने कहा कि आत्मा से शरीर का संबंध इस जन्म का है लेकिन कर्म और आत्मा का संबंध जन्म जन्मांतर से है। मुनि कमलेश ने कहा कि कर्म के उदय पर किसी निमित्त को दोष देनाअज्ञानता है उसे शत्रु मानने के बजाय मित्र मानना चाहिए जो कर्मों से मुक्ति में सहयोगी बन रहा है। राष्ट्रसंत ने कहा कि कर्मों ने तो महापुरुषों को भी नहीं छोड़ा तो हमारी क्या औकात है कानून अदालत से बच सकता है लेकिन कर्मों से बचाने की शक्ति साक्षात भगवान में भी नहीं है। जैन संत ने कहा कि अग्नि शत्रु अनु परमाणु बम से भी कर्म अनंत गुना ज्यादा खतरनाक है सम्यक ज्ञान और साधना के माध्यम सेकर्मों मुक्ति पाई जा सकती है। अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली शाखा जिला जोधपुर के अध्यक्ष विशाल मेहता कोरना काल में अपने 800 साथियों के साथ निरंतर निस्वार्थ भाव से सेवाएं की संघ की ओर से अभिनंदन किया गया।