
(निलेश बाफना की रिपोर्ट)
रतलाम । रतलाम के नए पुलिस कप्तान राहुलकुमार लोधा ने अपने पदभार ग्रहण करते ही सक्रियता दिखाई है, जिस तरह से उन्होंने कहा की वह आम जनता से संवाद कर उनकी तकलीफों को दूर करने का पूरा प्रयास करेंगे यह बात काबिले तारीफ है । मगर अभी नए पुलिस कप्तान को रतलाम के भौगोलिक स्थिति के बारे में खुद जानना पड़ेगा, उन्हें ध्यान रखना पड़ेगा की राष्ट्र
विरोधी गतिविधियों में भी रतलाम का नाम आया है। ऐसे में जिला पुलिस कप्तान के समक्ष रतलाम में अपराधों पर अंकुश लगाना एक बड़ी चुनौती है।
क्यूंकि जिस तरह से हरियाणा के नूह में जिस तरह की की घटना घटित हुई है कुछ इस तरह की घटना पहले रतलाम में घटित चुकी है और सिमी के लिए काम करने वाली एक सेल शुफा संघटन का मुख्यालय रतलाम रहा है। वही पुरे मध्यप्रदेश में रतलाम नगर सट्टे के अवैध व्यापार के लिए प्रसिद्ध है।
आज के समय में रतलाम की जो स्थिति है उसे देखते हुए नए कप्तान की बातो से लगता है की जिस तरह से वो आम जनता के साथ संवाद स्थापित करने की बात कह रहे है उससे लगता है की जिले की जनता को गुंडों और असामाजिक तत्वों से जनता को राहत मिल सकती है। साथ ही नगर में व्याप्त गुंडागर्दी पर भी अंकुश लगाने में मिल का पत्थर साबित होगा। साथ ही नए पुलिस कप्तान को अपने अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को भी हिदायत देना चाहिए कि वह भी जनता के बीच में जाए और उनकी तकलीफों को जाने और उनकी समस्याओं को दूर करे । अभी तक जिले के कई थाना क्षेत्र में गुंडागर्दी के साथ साथ चोरों और सट्टे बाजो का आतंक मचा हुआ है। वही रतलाम नगर की बात करे तो गुंडा तत्वों में पुलिस नाम का कोई खौफ नहीं बचा है ? आए दिन नगर में चाकू बाजी और मारपीट की घटना घटित हो रही है इस पर अंकुश लगना बहुत जरूरी है। रतलाम में अच्छे लोगो की कोई कमी नहीं है मगर उनसे संवाद बहुत जरूरी है, इसी से अपराधो पर अंकुश लग सकेगा ।