जाति पंथ धर्म की संकीर्ण मानसिकता मानव और मानव के बीच टकराव नफरत और अलगाव पैदा करता है -राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश


जोधपुर । संकीर्ण भावों का जितना जितना विसर्जन करते जाएंगे उतना ही धर्म के नजदीक जाते जाएंगे। उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने आचार्य प्रवर श्री राजतिलक सुरिश्वर जी के 99 जन्म कल्याणक पर भेरू बाग जैन मंदिर में धर्म सभा को संबोधित करते कहा कि जाति पंथ धर्म की संकीर्ण मानसिकता मानव और मानव के बीच टकराव नफरत और अलगाव पैदा करता है ।
उन्होंने कहा कि विश्व बंधुत्व की भावना जिसके दिल में साकार हो जाती है वहीं पर परमात्मा का निवास होता है विश्व के सभी धर्मों का मूल संदेश यही हैराष्ट्रसंत ने स्पष्ट कहा कि मानव होकर मानव से प्रेम न करें वह कितनी कठोर साधना कर ले कल्याण संभव नहीं है । जैन संत ने कहा कि संकीर्ण मानसिकता से परस्पर नफरत पैदा होती है वह ज्वाला और बम परमाणु बम से भी खतरनाक है । बाल मुनि मोक्ष तिलक जी ने कहा कि आचार्य प्रवर ने हजारों मछुआरे परिवारों को अहिंसक बनाया आज 590 वे तेले का पारना है शताब्दी समारोह की रूपरेखा बनाई गई गुरुप भक्तों ने 99 लाख का दान दिया एक ही भक्त ने अलग से 51 लाख रुपैया की घोषणा की महासती दर्शन रेखा एवं अक्षत मुनि जी ने विचार व्यक्त किए अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली की ओर से सभी मुनियों ने आचार्य प्रवर को आदर की चादर भेंट करते हुए आध्यात्मिक सूर्य से अलंकृत किया।