लेखक- अजय शर्मा

वचन निभाने को वन चल दे,
तुझमें वह अभीमान कहां है।
मन के रावण को जो मारे ,
वह वाला तुझमें राम कहां है।।
झूठ की भाषा पग-पग बोले,
मन को संतोष, आराम कहां है,
जो बस सच्चाई कहता था,वह वाला इंसान कहां है
मन के रावण को जो मारे , वह वाला तुझमें राम कहां है।।
ढूंढ रहा तू गली-गली में, गुरुद्वारे ,मस्जिद और गिरजाघर में,-2
झूठ की नैया अब है डोली, देख तेरा अंजाम कहां है,
बंद कर आंखें खुद में पाएगा ना राम यहां ना नाम वहां है।।-२