साधु की समता और मां की ममता का कोई सानी नहीं-आचार्य प्रवर श्री विजयराजजी मसा

छोटू भाई की बगीची में भू्रण हत्या ना करने का आव्हान

रतलाम,05 अक्टूबर। परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने भू्रण हत्या के पाप से बचने का आव्हान किया है। उनके अनुसार संसार में साधु की समता और मां की ममता का कोई सानी नहीं है। हमारा मन जितना मजबूत होगा, समता और ममता उतनी ही प्रगाढ होगी।
छोटू भाई की बगीची में चातुर्मासिक प्रवचन देते हुए आचार्यश्री ने कहा कि साधु समतामय और मां ममतामय रूप में जगत में कल्याण करने वाली होते है। सारी माताएं ममताशील बन जाए, तो भू्रण हत्या बंद हो जाएगी। ममता में थोडी सी संक्रिर्णता आ जाती है, तो माताएं हत्या जैसा पाप कर बैठती है। यह पाप जिदंगी भर का संताप देने वाला होता है। उन्होंने कहा कि दुनिया में प्रत्येक जीव अपने पुण्य लेकर आता है,इसलिए भू्रण हत्या करना किसी दृष्टि से उचित नहीं है। माताओं को हर हाल में इससे बचना चाहिए।
आचार्यश्री ने कहा कि हर परिस्थिति में समता रखने पर जोर देते हुए कहा कि बहू की गलती पर सास और बेटे की गलती पर बाप का बिगडना उचित नहीं है। गलती सास और बाप से भी हो सकती है, इसलिए समता रखते हुए गलती को सुधारकर आगे बढने का प्रयास करना चाहिए। वर्तमान में गलती पर साथ देने वाले बहुत कम मिलते है, जिससे समता विकसित नहीं हो रही। समता के मूल में मन होता है। विडंबना है कि आज मन बहुत आवारा हो रहा है। वैसे तो पशु आवारा होते है, लेकिन पशु से अधिक खतरनाक मन का आवारापन है। मन को सत्संग ही सयाना बनाता है, इसलिए अधिक से अधिक सत्संग करो। व्यक्ति का मन जितना समझदार होगा, वह समतापन को मजबूत करने वाला बनेगा।
आरंभ में श्री धेर्यमुनिजी मसा ने संबोधित किया। महासती श्री प्रभावती जी मसा ने गुरू की महिमा का गुणगान किया। आचार्यश्री से महासती श्री इन्दुप्रभाजी मसा ने 17 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। इस मौके पर आसीन्द श्री संघ की और शांतिलाल बेणूत ने चातुर्मास की विनती की। चंदरसिंह चैधरी ने भाव व्यक्त किए। हनुमंत नगर बैंगलुरू के महिला मंडल ने स्तवन प्रस्तुत किया। इस दौरान बडी संख्या मंे श्रावक-श्राविकागण उपस्थित रहे।