रतलाम,22 अक्टूबर। दुनिया एक बाजार है। इसमें धर्म और पुण्य की कमाई ही कमाई है। इस बाजार में जो ये कमाई कर लेता है, उसका बेडा पार हो जाता है। आप व्यापारी हो, तो आपको अच्छी तरह से पता है कि कमाई का सीजन कब आता है। सीजन में जो अच्छी से अच्छी और ज्यादा से ज्यादा कमाई कर लेता है, वहीं अच्छा व्यापारी होता है। यह बात परम पूज्य, प्रज्ञा निधि, युगपुरूष, आचार्य प्रवर 1008 श्री विजयराजजी मसा ने कही। छोटू भाई की बगीची में चातुर्मासिक प्रवचन के दौरान मनोबल का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि धर्म और पुण्य कमाने के सीजन में हम जितना मनोबल बढा सकते है, उतना अन्य सीजन में नहीं बढा सकतें। मनोबल बढाने का काम भी केवल मनुष्य भव में हो सकता है, अन्य भवों में चाहे, तो भी इसका अवसर नहीं मिलता। इस भव में जो मनोबल बढाता है, वह धीरे-धीरे मनोबली बन जाता है और जिसका मनोबल मजबूत होता है, वह बडे से बडा काम कर लेता हैं। आचार्यश्री ने कहा कि मनुष्य भव में मनोबल से सारे काम हो सकते है। तपस्या भी बिना मनोबल के नहीं होती। यदि कोई तप आराधना नहीं कर पाता है, तो इसका मतलब उनका मनोबल कमजोर है। मनोबल ही हमे सफल और विफल बनाता है। इसका मजबूत होना आवश्यक है। आरंभ में उपाध्याय प्रवर श्री जितेशमुनिजी मसा ने जीवन की सफलता के मंत्रों पर प्रकाश डाला। उन्होंने जप, तप और धर्म, पुण्य से आत्मा को परमात्मा बनाने का आव्हान किया। प्रवचन में कई लोगों ने तपस्या के प्रत्याख्यान लिए। इस दौरान बडी संख्या में श्रावक-श्राविकागण उपस्थित रहे।