
जावरा (अभय सुराणा) । पत्थर का स्वभाव है डूबना और लकड़ी का स्वभाव है तैरना पत्थर चाहे छोटा हो या बड़ा हो वहा डूबेगा लेकिन लकड़ी कितनी भी बड़ी हो तेरेगी जब मानव जन्म में आया हुआ जीव हल्का भी तिरेगा और भारी भी तिरेगा भगवन फरमाते है की गुणों से भारी और कर्मो से हलके जीव स्वयं तिरते है और दूसरो को भी तारते है इसलिए हमें चिंतन करना चाहिए और आध्यात्म के मार्ग पर चलना चाहिए उपरोक्त धर्मं सन्देश दिवाकर भवन पर विराजित आगम मनस्वी प्रवर्तक गुरुदेव विजयमुनि जी म सा ने फरमाए मधुर व्खायानी उपप्रवर्तक चंद्रेश मुनि जी ने भी धर्मं सभा को संबोधित करते हुए बताया की चिंतन करना हमारा दायित्व है चिंतन के माध्यम से हम धार्मिक सामाजिक पारिवारिक कर्तव्यों का निर्वाह करने में निपुण होगे दो शब्द है तीर्थ और तीर्थंकर दोनों में बड़ा अंतर है तीर्थंकर से तीर्थ बनता है तीर्थ एक स्थान है जिसके दर्शन करने से आत्म हर्षित होती है आत्मिक शांति मिलती है लेकिन तीर्थंकर की आराधना भक्ति स्तुति करने से उनके बताये मार्ग पर चलने से जीवन सार्थक हो जाता है।
हर इन्सान का कर्तव्य है व्यवहारिक कर्ज तो किसी भी तरह चुक जायेगा लेकिन कर्मो का कर्जा कब चुकाओगे आत्म निर्जरा के लिये पुरषार्थ के कदमो को आगे बढाना है तीर्थंकर केवल राह बताते है चलना स्वयं को पड़ेगा अपने आप को हल्का करने के लिये क्रोध मान माया लोभ को त्याग कर मुक्ति के मार्ग पर आगे बढो उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ के महामंत्री महावीर छाजेड, एवं अ भा जैन दिवाकर विचार मंच के राष्ट्रीय मिडिया प्रभारी संदीप रांका ने बताया की अरिहंत आराधिका प्रवचन मनीषी महासती विजय श्री सुमन ने धर्मं सभा को संबोधित करते हुए कहा की मनुष्य जन्म अनमोल है यह बहुत कठिनाई से प्राप्त होता है आप सभी कहते है खाली हाथ आये थे खाली हाथ जायेगे यह गलत है हम सभी अपने कर्मो के साथ आये थे और कर्मो के साथ ही जायेगें आत्म ही कर्म का करता है हमें परमात्मा के दिखाए मार्ग पर चलना है हमें चिंतन करना है की हमें किस मार्ग पर चलना है प्रतिदिन गुरुदेव के माध्यम से जिनवाणी की गंगा बह रही है हमें अधिक से अधिक लाभ लेना है। धर्मसभा मैं ओमप्रकाश श्रीमाल, संदीप रांका, सुजानमल औरा, शांतिलाल डांगी, कनकमल चोरडिया, बसंतलील चपडोद, सुशील चपडोद, अजीत रांका, अतुल मेहता, पुखराज कोच्चटा, मनोहरलाल चपडोद, जवाहरलाल श्रीश्रीमाल, अनिल पोखरना अशोक झामर,विजय भण्डारी, सुशील मेहता, वर्धमान माण्डोत, अभय सुराणा, पारसमल औरा, अनिल चपडोद, अशोक रांका, अशोक मेहता, पराग कोच्चटा, राजमल भंडारी, बाबूलाल भटेवरा, विनोद लुणीया, सुनिल मेहता, सुभाष चोरडीया, नेमिचंद रांका, महेंद्र रांका प्रफुल्ल तातेड,फतेहलाल मेहता आदि उपस्थित थे। संचालन महामंत्री महावीर छाजेड ने किया।