- उनका निधन देश के लिए अपूरणीय क्षति है
- शिक्षक सांस्कृतिक मंच द्वारा श्रद्धांजलि अर्पित

रतलाम । डॉ. जय कुमार जलज का निधन न केवल हिंदी साहित्य जगत की बहुत बड़ी क्षति है वरन समग्र समाज से विधाता ने एक अमूल्य हीरा छीन लिया है । जिनकी चमक दमक से पूरे शहर की साहित्यिक चेतना को ऊर्जा और प्रेरणा प्राप्त होती थी । एक शिक्षक के रूप में, साहित्यकार के रूप में आप सदैव सामाजिक रिश्तों को महत्व देते रहना आपकी शोहरत है तथा सहजता और सादगी सर्वाधिक लोकप्रिय रही । छात्रों के साथ-साथ सामाजिक रूप से आपका साहित्य सृजन आम जन में भी प्रभावित करने योग्य रहा है । उक्त विचार मूर्धन्य साहित्यकार भाषाविद पूर्व प्राचार्य डॉ. जयकुमार जलज के निधन पर शिक्षक सांस्कृतिक संगठन मंच द्वारा आयोजित श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित वक्ताओं ने व्यक्त किये ।
साहित्यकार चिंतक डॉ. मुरलीधर चांदनी वाला ने कहा कि आप लगभग 11 वर्षों तक रतलाम महाविद्यालय के प्राचार्य रहे और प्रतिदिन कक्षा में अध्यापन कार्य करने के लिए उपलब्ध रहते थे। आपकी सेवाएं साहित्य जगत के लिए सदैव अनुकरणीय रहेगी साहित्य सृजन के लिए विभिन्न भाषाओं में आपकी कई पुस्तक भी प्रकाशित हुई साथ ही देश के कई पुरस्कार आपको प्राप्त हुए । देश के प्रख्यात कवियों और साहित्यकारों का सानिध्य और उपस्थिति में आपको काव्य सृजन का अवसर प्राप्त हुआ था । मूलत ललितपुर उत्तर प्रदेश निवासी 90 वर्षीय जलज साहब नगर तथा देश की अनेक संस्थाओं से जुड़े हुए थे।
संस्था अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने अपनी श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि स्वर्गीय जलज साहब से मंच का गहरा रिश्ता रहा है । सन 2005 में उन्हें संस्था द्वारा लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड देकर सम्मानित किया गया था। मंच की गतिविधियों से आप बेहद प्रभावित रहे, आप का निधन पूरे शहर वासियों के लिए गहरी त्रासदी है । साहित्य जगत में आपका नाम सदैव बड़े सम्मान के साथ लिया जाता रहेगा । शिक्षाविद एवं पूर्व प्राचार्य डॉ.गीता दुबे ने कहा कि वह साहित्य जगत के शिखर शिरोमणि थे । आपने सदैव साहित्य सृजन के माध्यम से सामाजिक चेतना और विषमताओं को उजागर किया था। डॉ सुलोचना शर्मा कहां की हम सब जलज जी के सानिध्य में बहुत कुछ सिखते हुए आगे बढ़े हैं, विराट व्यक्तित्व और विराट विचार उनकी विशेषता रही है । रंगकर्मी पूर्व प्रचारक ओ.पी.मिश्रा ने कहा कि हम सब जलज जी के साहित्य सजन का रसपान करते आए हैं । हिंदी भाषा के प्रति उनका प्रेम और समर्पण अन्य लेखकों के लिए प्रेरणादायक रहेगा । साहित्यकार प्रवीणा दवेसर ने कहां की जलज जी की साहित्य साधना, कवियों, साहित्यकार और लेखकों के लिए सदैव प्रेरक बनी रहेगी। सचिव दिलीप वर्मा ने कहा कि हम सब जलज जी से जुड़े हुए थे, उनका व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली रहा था । श्यामसुंदर भाटी ने कहा कि उनकी काव्य शैली सहज और सरलता से परिपूर्ण थी । गोपाल जोशी, कृष्ण चंद्र ठाकुर, नरेन्द्र सिंह पंवार, राधेश्याम तोगड़े, नरेंद्र सिंह राठौड़, मनोहर लाल जैन, रक्षा के.कुमार, भारती उपाध्याय, वीणा छाजेड़, कविता सक्सेना, रमेश उपाध्याय, मदन लाल मेहरा, नूतन मजावदिया, देवेंद्र वाघेला ने भी श्रद्धांजलि व्यक्त की ।