भोगवाद की पाश्चात्य संस्कृति शैली रोग अशांति और तनाव को पैदा करती है- राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश

जोधपुर । अमृत जैसा किया गया भोजन भी उसको पचाने के लिए परिश्रम न जाए तो जहर के रूप में परिवर्तित हो जाता है उक्त विचार राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने महावीर भवन निमाज क हवेली में ह्रदय विश्व दिवस संबोधित करते कहा कि परिश्रम से आने वाला पसीना रोगों से मुक्ति दिलाता है रामबाण औषधि के समान है ।
उन्होंने कहा कि परिश्रम को योग ध्यान साधना स्वाध्याय और चिंतन में लगा दिया जाए तो अलौकिक चमत्कार प्रकट हो सकते हैं । मुनि कमलेश ने कहा कि भारतीय जीवनशैली पद्धति अपने आप में औषधि है तन को स्वस्थ मन को निर्मल और आत्मा को पवित्र बनाती है भोगवाद की पाश्चात्य संस्कृति शैली रोग अशांति और तनाव को पैदा करती है।
राष्ट्र संत ने कहा कि शाकाहार आदि सात्विक भोजन रोग मिटाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है मानसिक तनाव ही सब रोगों की जननी है । जैन संत ने फास्ट फूड के रोगों के लिए खुला निमंत्रण देने के समान है जहर से भी खतरनाक बताया बीड़ी सिगरेट धूम्रपान शराब तामसिक आहार त्याग किए बिना कितने डॉक्टर और दवाई आ जाए तो रोगों से मुक्ति नहीं दिला सकती घनश्याम मुनि अक्षत मुनि ने विचार व्यक्त किए कौशल मुनि जी ने मंगलाचरण किया

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