धर्म को अपने जीवन व्यवहार में उतारो यही अपनी आत्मा का उद्धार करेगा – आचार्य श्री विजय राज जी म.सा.

जावरा (अभय सुराणा) । संत को भक्ति चाहिए एवं सासारिक लोगों को शक्ति। मानव मात्र की चाह होती है कि मुझे धन रुपी शक्ति प्राप्त हो पैसे को प्राप्त करने के लिए आज व्यक्ति अपनी पूरी शक्ति लगा देता है। वर्तमान समय में पैसा अपने आप में बहुत बड़ी शक्ति हैसांसारिक लोगों की हर समय यही चाह रहती है कि मुझे पैसा कमाना है अधिक से अधिक धन इकट्ठा करना है ज्ञानीजन ने शक्ति को पाने के लिए एक फार्मूला दिया है वह है भक्ति का भक्ति से शक्ति प्राप्त होगी फिर कभी विपत्ति नहीं आएगी देव गुरु एवं धर्म की भक्ति करने से आपका धन बढ़ता है आपकी शक्ति बढ़ती है एवं विपत्तियां कटती है आज आपको जो धन प्राप्त है वह पूर्व जन्मों के भक्ति का ही फल है परिणाम है कि आप धनवान है चिंतन करो की जो समय मिला है उसे प्रभु भक्ति में लगाऐ परमात्मा से जुड़ने का प्रयास करें एक न एक दिन सफलता प्राप्त होगी धर्म को अपने जीवन व्यवहार में उतारो यही अपनी आत्मा का उद्धार करेगा। उक्त धर्म उपदेश आचार्य श्री विजय राज जी महाराज साहब ने दिवाकर भवन पर धर्मसभा में फरमाए धर्म सभा को साधु श्रेष्ठ श्री पारस मुनि जी महाराज साहब ने भी धर्म उपदेश दिया। जैन दादावाड़ी से आचार्य श्री संत मंडल का मंगल प्रवेश हुआ जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया धर्म सभा का संचालन महावीर छाजेड़ ललित भंडारी ने संयुक्त रूप से किया आज की प्रभावना का लाभ सुशील कुमार विजय कुमार कोचट्टा शांतिलाल जी कावड़िया गुप्त दानदाता परिवार ने लिया स्वामी भक्ति का लाभ शांत क्रांति सघ ने लिया।