


रतलाम, 20 मार्च। आचार्य श्री विजय कुलबोधि सूरीश्वरजी म.सा. की निश्रा में एक बार फिर से मोहन टॉकीज में पांच दिनी प्रवचन की शुरुआत हुई। आचार्यश्री के ऐतिहासिक चातुर्मास के पश्चात एक बार फिर से उनके रतलाम में पांच दिन तक अलग-अलग विषय पर प्रवचन होंगे। इसमें प्रथम दिवस में नई दृष्टि-नई दिशा विषय पर प्रवचन हुए, जिसमें आचार्य श्री ने आग्रह, विग्रह, पूर्वाग्रह और परिग्रह को परिभाषित किया।
श्री देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ, गुजराती उपाश्रय श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वे. पेढी, रतलाम के तत्वावधान में मोहन टॉकीज में आयोजित प्रवचन में आचार्य श्री ने कहा कि हम यदि प्रभु का अनुग्रह पाना चाहते है, तो सबसे पहले आग्रह, विग्रह, पूर्वाग्रह और परिग्रह से हम मुक्त बने। ऐसा करने से शत-प्रतिशत हमें प्रभु का अनुग्रह प्राप्त होगा। हम प्रभु से विनती करें कि प्रभु आपका अनुग्रह मिले और यह मनुष्य रूपी हमारा पात्र खाली हो जाए।
आचार्य श्री ने आग्रह को परिभाषित करते हुए कहा कि हमें जो कपड़ा, कार, मोबाइल पसंद है, वह सब मिल जाए, इस आग्रह से हम परेशान है। हमें जो पसंद है, उसे प्राप्त करने के बजाए, ईश्वर ने जो दिया है, उसे पसंद करना चाहिए। प्रभु का आग्रह हमें मिले उसके लिए अपने आग्रह के पात्र को खाली करना चाहिए। आज घर-घर में किसी न किसी बात पर झगड़ा होता रहता है। हम विग्रह से मुक्त होंगे तब अनुग्रह मिलेगा।
आचार्य श्री ने कहा कि जो व्यक्ति आपसे दिल से बात करता हो, उससे दिमाग से बात मत करो। हमें स्वयं का पूर्वागृह लगता है। हर कोई किसी न किसी मान्यता को पकड़कर बैठा है। इसी प्रकार अनुग्रह को पाने के लिए परिगृह को खाली करना होगा। मोहन टॉकीज में हुए पहले दिन के प्रवचन का लाभार्थी लालचंद सुराणा परिवार रहा।
गुरुवार को माय थ्री प्रेयर्स विषय पर होंगे प्रवचन
आचार्य श्री की निश्रा में मोहन टॉकीज में चल रहे प्रवचन के दूसरे दिवस माय थ्री प्रेयर्स विषय पर प्रवचन होंगे। देवसूर तपागच्छ चारथुई जैन श्रीसंघ, गुजराती उपाश्रय श्री ऋषभदेवजी केशरीमलजी जैन श्वे. पेढी, रतलाम द्वारा सभी धर्मालुजनों से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित रहने का आह्वान किया है।