बालेश्वर । पाश्चात्य संस्कृति के रंग में रंगे हुए आध्यात्मिक संस्कृति का राग अलापना स्वयं की आत्मा के और परमात्मा के साथ धोखा करने के सामान है उक्त विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने सरपंच रेवता राम के निवास पर व्यक्त करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का निर्माण ऋषि-मुनियों के आध्यात्मिक ज्ञान के सहारे हुआ है पूरा विश्व उसका लोहा मान रहा है उसी से विश्व गुरु बनने का सौभाग्य मिला । उन्होंने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति की विलासिता ने रोग अशांति को जन्म दिया है भारतीय संस्कृति स्वास्थ और शांति की सुरक्षा के लिए सक्षम है विज्ञान भी सिद्ध कर दिया है।
राष्ट्रसंत ने कहा कि संस्कृति से ही संस्कारों का संचार होता है और उसी से चरित्र का निर्माण होता है पाश्चात्य संस्कृति को अपनाकर गौरवान्वित महसूस और अपनी संस्कृति के साथ सौतेला व्यवहार यह अन्याय है जैन संत ने कहा कि पाश्चात्य संस्कृति का हमला आतंकवाद से भी खतरनाक है जिसने संस्कृति को खोखला कर दिया विदेशी अपनी संस्कृति को अपना रहे हैं और जो वह थूक रहे उसे हम चाट रहे हैं।
मुनि कमलेश की पदयात्रा को अमर यादगार में बदलने के लिए सरपंच जी देव रेवतराम जीने कामधेनु सर्कल बनाने का संकल्प लेते हुए राष्ट्रसंत का अभिनंदन किया ।