‘सुनें सुनाएं’ के 30 वें सोपान में पढ़ी गई सशक्त रचनाएं


रतलाम। महिलाओं को केन्द्र में रखकर महिला रचनाकारों द्वारा सशक्त रचनाएं लिखी गई हैं। इन रचनाओं में भोगा हुआ यथार्थ महसूस किया जा सकता है। इस यथार्थ को महिलाओं का ही स्वर मिले तो उनकी पीड़ा को समाज की शेष आधी आबादी तक पहुंचाया जा सकता है। उक्त विचार ‘सुनें सुनाएं’ के तीसवें सोपान में उभर कर सामने आए।
जी.डी.अंकलेसरिया रोटरी हॉल रतलाम पर आधी आबादी को समर्पित सोपान में
महिलाओं विषयक रचनाओं का पाठ महिलाओं द्वारा किया गया। महिला रचनाकारों की इन रचनाओं का पाठ महिलाओं ने कर नारी महत्व का अहसास करवाया।
स्त्री शक्ति को समर्पित इस सोपान में इन्दु सिन्हा ने गगन गिल की रचना ‘ लड़की अभी उदास नहीं है ‘ , रश्मि शर्मा ने सुषमा अरोड़ा की कविता ‘स्त्री हूँ मैं ‘ , रजनी व्यास ने अमृता प्रीतम की रचना ‘ मैं तुम्हें फिर मिलूंगी’ , प्रिया लोदवाल ने कोकिला पारेख की कविता ‘गर्व है मुझे मैं नारी हूं ‘ , डॉ.अदिति व्यास ने मनीषा शुक्ला की रचना ‘ दाल मखनी ‘ , नूतन मजावदिया ने श्रद्धा शौर्य की रचना ‘ हे विरहनी व्यर्थ के आलाप गाना छोड़ दे’ , डॉ.स्वर्णलता ठन्ना ने अनामिका की रचना ‘ स्त्रियां ‘ , डॉ.गीता दुबे ने मालिनी गौतम की रचना ‘ पहले जैसा होना संभव नहीं ‘ तथा योगिता राजपुरोहित ने निर्मला पुतुल की रचना ‘ उतनी दूर मत ब्याहना ‘ पाठ किया । इस सोपान के समस्त सूत्र महिलाओं के हाथों में ही रहे। यहां महिला सशक्तिकरण का एक दृश्य दिखाई दे रहा था।
इनकी उपस्थिति रही
आयोजन को अपनी उपस्थिति से सार्थक बनाने में ललित भाटी इंदौर, प्रो. रतन चौहान , गुस्ताद अंकलेसरिया, ओम प्रकाश मिश्रा, आई.एल . पुरोहित , ऋषिकेश शर्मा , माधव शर्मा , विनोद संघवी , सुभाष यादव , रीता दीक्षित , मीनाक्षी मलिक , सुदर्शन व्यास , दुष्यंत कुमार व्यास , प्रो. दिनेश राजपुरोहित, डॉ . नरेंद्र कुमार गुप्ता , सत्यनारायण सोढ़ा, हरेंद्र कोठारी , सरिता दशोत्तर , डॉ. गायत्री तिवारी , संजय परसाई ‘सरल’ , जितेंद्र सिंह पथिक , अशोक कुमार शर्मा , श्याम सुंदर भाटी , सुशीला कोठारी , कविता व्यास , मयूर व्यास , चंद्रकांत वायगांवकर , डॉ. प्रदीप सिंह राव , जीएस खींची , आशा श्रीवास्तव , कुलदीप पाठक , राजकुमार , मणिलाल पोरवाल , नरेंद्र सिंह डोडिया , डॉ. रविंद्र उपाध्याय , रक्षा मिश्रा , नीरज कुमार शुक्ला , अरुण भटनागर , प्रकाश सेठिया , चंद्रकांता श्रीमाली , भेरुलाल परमार , ललित चौरडिया , विष्णु बैरागी , महावीर वर्मा , आशीष दशोत्तर का सार्थक सहयोग रहा । इस अवसर पर दुष्यंत कुमार व्यास द्वारा रचना पाठ करने वाली महिलाओं को पेन का उपहार एवं डॉ . प्रदीप सिंह राव द्वारा स्वर्गीय टेंपटन अंकलेसरिया को समर्पित पुस्तक भेंट की गई ।
अगला सोपान हास्य व्यंग्य पर केंद्रित
‘सुनें सुनाएं’ का 31 वां सोपान अप्रैल माह में होगा । यह सोपान हास्य और व्यंग्य की स्तरीय रचनाओं पर केंद्रित रहेगा । आयोजन में पांच नए साथी एवं पांच पूर्व में पाठ कर चुके साथी अपनी प्रिय रचना का पाठ करेंगे।