मनुष्य भव बहुत दुर्लभ है- पूज्य श्री अतिशयमुनिजी म.सा.

रतलाम, 2 जुलाई 2025 । धर्मदास गणनायक प्रवर्तक श्री जिनेंद्रमुनिजी म.सा. आदि ठाणा – 9 काटजू नगर स्थित समता भवन में विराजित है। यहां बुधवार को हुए व्याख्यान में पूज्य श्री अतिशयमुनिजी म.सा. ने फरमाया कि संसारी जीव प्रायः पाप क्रियाओ में ही रचा पचा रहता है। पाप के मार्ग पर चलने वाला जीव अपने अच्छे कर्मों को भी खत्म कर देता है। संसार की कोई भी प्रवृत्ति बिना पाप क्रिया के संभव नहीं। लेकिन यदि आप संयम की प्रवृत्ति अपनाते है तो वह बिना पाप क्रिया के संभव है। पाप क्रिया के प्रति हमें खेद होना चाहिए, हमें उसका त्याग करना चाहिए। यदि इसे पाप का घर मानेंगे तो इसमें रहने की इच्छा खत्म हो जाएगी। सांसारिक जीवन बहुत खतरनाक है। यह पापों से भरा हुआ है। यह ठीक उस प्रकार है, जैसे कोई बारूद के ढेर पर खड़ा हो और उसका जीवन सुरक्षित नहीं है। जिनशासन में सभी जीवो के लिए एक जैसा भाव है। आपको पाप क्रिया करते इतने साल बीत गए, आप को परेशानी का अनुभव हुआ क्या? इस बात का चिंतन करना। एक बार मनुष्य भव की डोर हाथ से छूटी तो फिर कब हाथ आएगी पता नहीं। वर्तमान में आपके पास धर्म करने की इतनी अनुकूलता है, यह आपको वापस मिले या नहीं मिले, इस बात की कोई गारंटी नहीं है। एक बार मनुष्य भव हाथ से चला गया पुनः इसे प्राप्त करना अति कठिन है। मनुष्य भव बहुत दुर्लभ है कई भव खपाने के बाद मनुष्य भव मिलता हैं।
रतनपुरी गौरव श्री श्रेयांश मुनि जी ने कहा कि आप जिनवाणी सुन रहे हैं लेकिन वह फलीभूत हो रही है या नहीं? आप इसका पता कैसे लगाएंगे। यह बात आपको आपका मन बताएगा कि वह परिवर्तित हो रहा है या नहीं। यदि व्यापार-परिग्रह बढ़ाने की इच्छा होती है मतलब आप पर कोई असर नहीं पड़ा और यदि मन परिवर्तित हो रहा है यानी कि असर हो रहा है। भगवान के पास जब कोई व्यक्ति शंका लेकर जाता है तो वह पहले ही उसे जान लेते हैं। वह ऐसा इसलिए करते हैं जिससे कि आपकी श्रद्धा उनके प्रति और बढ़ जाए, क्योंकि भगवान सर्वज्ञ है। संसार में बहुत सारे कुमार्ग हैं, जिस पर चलकर लोग भ्रष्ट हो रहे हैं। आप किस मार्ग पर चल रहे हैं। कहीं जाने के लिए पहले निर्णय लेना होता है, उसके बाद ही मार्ग पर चलना होगा। यदि हमें मोक्ष में जाना है तो उसका श्रेष्ठ मार्ग संयम है। यदि आपको मार्ग पता है तो जल्दी पहुंच जाओगे। मोक्ष के मार्ग पर चलने के लिए पुरुषार्थ करना पड़ता है। दुकान पर बैठकर मोक्ष नहीं पाया जा सकता है। पाप अनंत काल से दुखी करते आए हैं और आगे भी दुखी करते रहेंगे। समय अपनी गति से बीत रहा है। हम जिन कर्मों से दुखी होते हैं, उन्हें घटाना है। भगवान की वाणी सुनकर आगे बढ़ना है जिससे यह भव तो ठीक आने वाला भव भी सुधर जाएगा। संचालन सौरभ कोठारी ने किया। प्रभावना का लाभ सुशीलादेवी अमरचंदजी झामर परिवार व भारत मलजी हेमंत मोदी परिवार ने लिया ।