आप खुश रहना चाहते है तो सबसे पहले मैं को छोड़े, जहां मैं है वहां समस्या होती है – डॉ. श्री संयम लताजी म.सा.

जैन सोशल ग्रुप रतलाम ग्रेटर ने नीम चौक जैन स्थानक पर प्रवचन का किया श्रवण

रतलाम। श्रमण संघीय जैन दिवाकरीय महासाध्वी डॉ. श्री संयम लताजी म.सा. आदी ठाना-4 ने अपने प्रवचन में कहा कि आई वांट हैप्पीनेस, यदि आप खुश रहना चाहते है तो सबसे पहले आई “मैं ” को छोड़ो, जँहा ” मैं ” है, मेरा है वँहा समस्या है। फिर वांट (चाहना) छोड़ो, किसी भी वस्तु की चाहत को छोड़ दो, चाहत कभी पूरी नही होती ।फिर बचेगा केवल हैप्पीनेस। बस यही है खुश रहने का फार्मूला । उक्त विचार नीमचौक स्थानक पर आयोजित धर्मसभा में महासती दक्षिण चन्द्रिका डॉ संयमलता म.सा. ने व्यक्त करते आपने फरमाया की इस संसार के अंदर कौन सुखी है, आप सुखी है या दुखी है, हर व्यक्ति इस संसार में दुखी है कोई शारीरिक कोई मानसिक कोई आर्थिक रूप से दुखी है। इस संसार में एक व्यक्ति हँसता है तो दस व्यक्ति रोते हैं ।देवलोक के देवता भी मनुष्य जन्म पाने के लिये तरसते है। क्योंकि देवता वृति नही हो सकते है, वो त्याग नियम प्रत्याख्यान नही कर सकते है। मनुष्य क्षण में दुःख और क्षण में सुख महसुस करने लगता है। थोड़ी सी गर्मी लगी दुख थोड़ी सी हवा चली सुख। गरीब मंदिर के बाहर बैठकर माँगता है और अमीर मंदिर के अंदर माँगता है । निसंतान दुखी है, संतान वाला संतान के कारण दुखी है। गरीब शाम के भोजन की चिंता को लेकर परेशान है, अमीर अपने धन की सुरक्षा के कारण चिंतित है । जिसके पास सबकुछ है धन दौलत अच्छा परिवार वो इस कारण दुखी है की बीपी शुगर के कारण वो दो पैसे का नमक और दो पैसे की शक्कर तक नही खा पा रहा है । रूखा सूखा भोजन उसे मजबूरी में खाना पड़ रहा है। देख नही पाए तो दुखी, बोल नही पाए तो दुखी, सुन नही पाए तो दुखी, लकवा आदि बीमारी के कारण स्पर्श नही कर पाए तो दुःख। मतलब दुनिया में दुःख के हजार कारण है और पूरी दुनिया में घुम लो सब भौतिक साधन संसाधन जुटा हो लेकिन असली सुख आध्यात्मिक सुख है असली सुख मन के भीतर का सुख है मन को शांत करना असली सुख है। श्रमण संघीय जैन दिवाकरीय महासाध्वी डॉ. श्री संयम लताजी म.सा. डॉ. श्री अमित प्रज्ञाजी म.सा., डॉ. श्री कमलप्रज्ञाजी म.सा. श्री सौरभ प्रज्ञाजी म.सा. आदि ठाणा -4 का आराधनामय चातुर्मास त्याग तपस्या के साथ नीमचौक स्थित जैन स्थानक में चल रहा है । JSG रतलाम ग्रेटर ने इस चातुर्मास में हर सप्ताह किसी एक स्थानक में जाकर वहाँ विराजित साधु संतों के प्रवचन सुनने का निश्चय किया है । रतलाम में करीब 10 संघों में चातुर्मास चल रहे हैं।इसी कड़ी में जैन सोशल ग्रुप रतलाम ग्रेटर के दम्पति सदस्यों ने आज नीमचौक स्थित वर्धमान जैन स्थानक वासी श्रावक संघ में आयोजित प्रवचन का श्रवण किया और वहां विराजित सतियों के दर्शन वन्दन किये । मांगलिक श्रवण की।प्रवचन पश्चात ग्रुप अध्यक्ष श्री सन्दीपजी चौरड़िया की माताजी श्रीमती कांतादेवी माणकलाल जी चौरड़िया के द्वारा वहां पधारे सभी श्रावकों को प्रभावना प्रदान की गई और निमचौक संघ ने भी प्रवचन सुनने पधारे सभी श्रावकों के लिए नवकारसी का आयोजन रखा ।बड़े हर्ष का विषय है कि ग्रुप से बहुत अधिक सदस्य प्रवचन सुनने पधारे । निमचौक स्थानक के अध्यक्ष श्री अजयजी खमेसरा और ग्रुप अध्यक्ष श्री सन्दीप चौरड़िया, उपाध्यक्ष निलेश गोधा सचिव श्री यशवन्त पावेचा,प्रमोद धींग,कोषाध्यक्ष श्री जितेश गेलड़ा, प्रवचन श्रवण समिति अध्यक्ष श्री संजयजी चपरोट,श्री मेघकुमार लुनिया,श्री महेंद्र चौपड़ा, महेंद्र खमेसरा, वीरेंद्र पाटनी ने ग्रुप से पधारे सभी दम्पति सदस्यों को धन्यवाद देते हुए सभी की अनुमोदना की है और अगले सप्ताह होने वाले आयोजन में अधिकाधिक संख्या में पधारने के लिए ग्रुप सदस्यों से निवेदन किया है ।