जिसे एकता में विश्वास नहीं है उसके पास कुछ नहीं, विश्व के सभी धर्मों ने एकता को ही सर्वोपरि माना है- राष्ट्रसंत कमलमुनि कमलेश

मांडवला । एक-एक धागा अलग पड़ा है कचरे के रूप में नजर आता है वही मिलकर रस्सी का रूप ले ले हाथी बांधने की शक्ति उसमें आ जाती है संगठन ही धर्म का प्राण है मुख्य विचार राष्ट्र संत कमलमुनि कमलेश ने जहाज मंदिर में गच्छाधीपति मणि प्रभ सागर से परस्पर वार्ता के दौरान व्यक्त करते कहा कि एकता की नींव पर ही अहिंसा की मंजिल खड़ी की जा सकती है
राष्ट्रसंत ने कहा कि एकता में विश्वास नहीं है उसके पास नहीं विश्व के सभी धर्मों ने एकता को ही सर्वोपरि माना है। जैन संत ने कहा कि महापुरुषों ने अपने से ज्यादा संगठन को महत्त्व दिया उसकी रक्षा के सर्वस्व न्योछावर किया । श्री मणि प्रभ सागर जी ने बताया कि कलयुग में संगठन से बड़ा और कोई धर्म नहीं हो सकता मार्ग अलग हो सकते मंजिल एक है । उन्होंने कहा कि साधना से सफलता में समय लग सकता है लेकिन संगठन से दूर से ही पल सफलता चरण चूमती है सामाजिक धार्मिक राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय ज्वलंत समस्याओं के ऊपर दोनों महापुरुषों के विचारों का आदान-प्रदान हुआ भारत सरकार की ओर से सम्मानित क्रांतिकारी राष्ट्रसंत पूरे देश में कश्मीर कन्याकुमारी तक करीब 80000 किलोमीटर पदयात्रा के द्वारा सर्वधर्म सद्भाव राष्ट्रीय एकता व्यसन मुक्ति गौ रक्षा विश्व शांति के लिए वैचारिक क्रांति का शंखनाद करते हुए आज जहाज मंदिर पधारे प्रशासन के सुंदर सेवाएं समर्पित रही अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली की ओर से गौ रक्षा व्यसनमुक्ती मुक्ति रथ जन जागरण के लिए साथ में है।