- जीवन में सबसे महत्वपूर्ण गुरू का स्थान,गुरू ही कराते भगवान का ज्ञान-पद्मकीर्तिजी म.सा.
- अनंत चतुर्दशी पर कल 1008 उपवास,चार पीढ़ी वाले परिवार कराएंगे सामूहिक पारणा

भीलवाड़ा,5 सितम्बर। जीवन में वास्तविक शांति प्राप्त करनी है तो घर का वातावरण पवित्र एवं पावन बनाना पड़ेगा। हमारी दिशा सही होगी तो दशा भी सही रहेगी ओर दिशा बिगड़ी हुई है तो दशा भी बिगड़ जाएगी। इसलिए वास्तु का महत्व समझना होगा ओर हमारे घर का वास्तु सही हो यह सुनिश्चित करना चाहिए। घर का वास्तु सही नहीं होने का असर परिवार की मानसिक ओर शारीरिक स्थिति पर भी दृष्टिगोचर होता है। ये विचार अनुष्ठान आराधिका ज्योतिष चन्द्रिका महासाध्वी डॉ. कुमुदलताजी म.सा. ने आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति द्वारा सुभाषनगर श्रीसंघ के तत्वावधान में दिवाकर कमला दरबार में शुक्रवार को धर्मसभा में व्यक्त किए। उन्होंने घर के वास्तु से जुड़े विभिन्न पहलूओं की चर्चा करते हुए कहा कि जैन आगम में भी वास्तु का महत्व समझाया गया है। घर में जो स्थान परमात्मा की पूजा के लिए नियत हो उसके उपर अनावश्यक सामग्री नहीं रखनी चाहिए ओर स्थान की पवित्रता का ध्यान रहना चाहिए। वास्तु दोष रह जाने का असर मानसिक शांति पर भी पड़ता है। जहां वास्तु सही होता है वहां सभी सदस्य शांति व खुशी से रहते हुए प्रेमपूर्वक भोजन करते है। धर्मसभा में वास्तुशिल्पी पद्मकीर्तिजी म.सा. ने शिक्षक दिवस के अवसर पर गुरू के महत्व पर चर्चा करते हुए कहा कि जीवन में गुरू का स्थान सबसे महत्वपूर्ण होता है। माता-पिता व गुरू ही बच्चें के भविष्य का आधार तैयार करते है। माता बच्चें की प्रथम गुरू होती है जो उसे सुसंस्कार प्रदान करती है ओर शिक्षा प्रदान करने वाला गुरू उसे संसार सागर से पार होने के लिए ज्ञान देता है। गुरू ही होता है जो उसे भगवान की प्राप्ति का मार्ग बताता है। गुरू के बिना जीवन की नैया पार नहीं हो सकती। धर्मसभा में विद्याभिलाषी साध्वी राजकीर्तिजी म.सा.का भी सानिध्य प्राप्त हुआ। धर्मसभा में जैन कॉन्फ्रेंस महिला शाखा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कल्पना धारीवाल, पंकज संचेती एवं नेहा छाजेड़ ने भी विचार व्यक्त किए। धर्मसभा में नासिक रोड से पधारे महिला मण्डल की कल्पना धारीवाल, मधु कोठारी, मुंबई से कमलेश सुराना, लोकेश बड़ाला, श्रीरंगपट्नम के मंगल दक, रतलाम के सौरभ बोथरा, उमराव मेड़तवाल, पंकज संचेती आदि का स्वागत आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति के अध्यक्ष दौलतमल भड़कत्या, सुनील नाहर,मदनलाल सिपानी, बंशीलाल बोहरा, अनिल कोठारी, आशीष भड़कत्या,प्रवीण पोखरना, महावीर कच्छारा, महेन्द्र जैन, महिला मण्डल की निर्मला भड़कत्या,लाड़जी मेहता, सुमित्रा बोथरा,राखी खमेसरा आदि ने किया। संचालन चातुर्मास समिति के अनिल कोठारी ने किया।
साध्वी पद्मकीर्तिजी म.सा. ने सम्पन्न कराई पद्मावति एकासन आराधना विधि
पूज्य महासाध्वी कुमुदलताजी म.सा. के सानिध्य में शुक्रवार को सुबह प्रवचन के बाद एकासन विधि सम्पन्न कराई गई। माता पद्मावती की आराधना करते हुए एकासन विधि वास्तुशिल्पी साध्वी पद्मकीर्तिजी म.सा. ने सम्पन्न कराई। उन्होंने बताया कि चातुर्मास में 16 शुक्रवार को पद्मावती एकासन कराने का क्या महत्व है ओर जीवन में इससे किस तरह के बदलाव महसूस किए जा सकते है। पद्मावती एकासन आरधना में भीलवाड़ा शहर व आसपास के क्षेत्रों से 550 से अधिक श्रावक-श्राविकाएं इसमें शामिल हुए। चातुर्मासिक साप्ताहिक पद्मावत एकासन आराधना का लाभ भीलवाड़ा निवासी चंद्रादेवी गौरव कुणाल प्रीति सुराणा परिवार, लाड़देवी दीपचंद प्रतीक प्रियांश धीर सिंघवी परिवार, बिजयनगर निवासी अभय अभिनव अनुज तातेड़ परिवार, महावीरप्रसाद त्रिलोकचंद, सुनीलकुमार सुशील रांका परिवार, भंवरलाल ओमप्रकाश वेदप्रकाश सोनी परिवार एवं मनोजकुमार राजेन्द्रकुमार सोनी परिवार ने प्राप्त किया। लाभार्थी परिवारों का आध्यात्मिक चातुर्मास आयोजन समिति एवं सुभाषनगर श्रीसंघ द्वारा स्वागत बहुमान किया गया।
अनंत चतुर्दशी पर कल 1008 उपवास,चार पीढ़ी वाले परिवार कराएंगे सामूहिक पारणा
चातुर्मासिक आयोजनों के तहत 6 सितम्बर को अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर 1008 सामूहिक उपवास तप की आराधना होगी। उपवास तपस्वियों के सामूहिक पारणे 7 सितम्बर सुबह सुभाषनगर स्थानक में होंगे ओर उसी दिन सुबह प्रवचन में समाज के चार पीढ़ी वाले परिवारों का सम्मान किया जाएगा। इस आयोजन को लेकर तैयारियां की जा रही है। अनुष्ठान आराधिका साध्वी कुमुदलताजी म.सा. आदि ठाणा के सानिध्य में चातुर्मास के तहत 21 सितम्बर को 24 घंटे की विशेष अनुष्ठान आराधना के लिए पंजीयन कार्य जारी है। इसके तहत तीर्थंकर अरिष्टनेमी भगवान की 180 माला एवं तीर्थंकर पार्श्वनाथ भगवान की 100 माला फेरनी होगी।