
रतलाम 6 सितंबर । कहते हैं, मृत्यु अंत नहीं… किसी और की शुरुआत हो सकती है बाजना बस स्टेण्ड निवासी स्व .रतनलाल श्रीमाल(बाबू सेठ) की धर्मसहायिका शुश्राविका श्रीमती कमलादेवी श्रीमाल ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में भी समाज को कुछ लौटाने का संकल्प निभाया । उनके निधन के उपरांत नेत्रदान के माध्यम से दो जरूरतमंदों की दुनिया अब उजियारी हो गई है। यह न सिर्फ एक संवेदनशील निर्णय था, बल्कि समाज को सेवा, संवेदना और जागरूकता का जीवंत संदेश भी है।
इस पुण्य कार्य का सफल समन्वय ‘नेत्रम संस्था’ द्वारा किया गया। संस्था के हेमन्त मूणत ने बताया कि श्रीमती कमलादेवी श्रीमाल के सुपुत्र मनोज श्रीमाल एवं परिजनों को ओमप्रकाश अग्रवाल ,सुदीप वागरेचा, ने नेत्रदान हेतु प्रेरित किया। सहमति के तत्काल बाद
रतलाम मेडिकल कॉलेज की डीन डॉ. अनीता मुथा को सूचना दी गई। डॉ. मुथा के निर्देशन में नेत्र विभागाध्यक्ष डॉ. रिशेन्द्र सिसोदिया के नेतृत्व में नर्सिंग ऑफिसर विनोद कुशवाह,हैप्पी पीटर, ने किशोर पवार के सहयोग से नेत्र संग्रहण की प्रक्रिया को पूर्ण रूप से सफलतापूर्वक संपन्न किया।विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि नेत्रदान टीम को रतलाम मेडिकल कॉलेज से दिवंगत के निवास स्थान तक पहुँचाने और पुनः वापसी की संपूर्ण व्यवस्था नेत्रम संस्था के सदस्य नवनीत मेहता ने अपने निजी वाहन से की गई, जो उनकी निःस्वार्थ सेवा भावना का प्रमाण है।
इस भावनात्मक क्षण में अनेक स्नेहीजन, शुभचिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता हेमन्त कोठारी, जितेन्द्र (जितु) चोपड़ा, विपिन श्रीमाल, प्रदीप डांगी, राजेन्द्र श्रीमाल, अशोक पिरोदिया,ओमप्रकाश अग्रवाल, भगवान ढलवानी, शलभ अग्रवाल, गिरधारीलाल वर्धानी, सुशील मीनु माथुर, गोपाल राठौड (पतरा वाला)संदीप पीपाड़ा ,कुशल अग्रवाल,संजय गोधा,भक्तावर पवार आदि उपस्थित रहे। नेत्रम संस्था ने श्रीमाल परिवार के इस निर्णय को “अंधकार में उजास की लौ” बताया है और समाज से अपील की है कि मृत्यु के बाद भी जीवन देने वाले इस कार्य में सहभागी बनें।