नेत्रदान: अंधकार से उजाले की ओर चार जिंदगी


रतलाम 14 सितम्बर। नेत्रम संस्था के सतत प्रयासों से रतलाम शहर में दो परिवारों ने अपने दिवंगत परिजनों का नेत्रदान कर समाज के सामने अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इन नेत्रदानों से चार नेत्रहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि प्राप्त होगी।
पहला नेत्रदान – रामगढ़ निवासी बंशीलाल शर्मा की धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या बाई शर्मा के निधन उपरांत उनके पुत्र गजेन्द्र शर्मा (चिंटू) एवं परिजनों द्वारा किया गया। इस प्रेरक निर्णय में वरिष्ठ भाजपा नेता कन्हैया लाल मौर्य समाजसेवी ओमप्रकाश अग्रवाल का विशेष योगदान रहा।
दूसरा नेत्रदान – घासबाजार निवासी, पंडितवर्य स्व.मिश्रीमल लुणावत के सुपुत्र सुश्रावक बाबूलाल लुणावत के निधन उपरांत उनके भतीजे चितरंजन ,दीपेंद्र ,अभय ,हर्ष लुणावत सुपुत्र जयदीप लुणावत एवम परिजनों द्वारा किया गया। इस निर्णय में दिनेश जैन,लायन सुनील के जैन का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
रतलाम रेड क्रॉस सोसायटी संचालक एवम नेत्रम संस्था के संस्थापक हेमंत मूणत ने बताया कि परिजनों की सहमति मिलते ही गीता भवन न्यास के ट्रस्टी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल को सूचना दी गई। उनकी टीम — मनीष तलाच एवं मोहनलाल राठौड़ — ने त्वरित प्रयास करते हुए नेत्र संरक्षण की प्रक्रिया विधिवत पूर्ण की।
इस अवसर पर नेत्रदान प्रक्रिया के दौरान डॉ. राजेन्द्र शर्मा, रविन्द्र यादव, मुकुल दलाल, अजय भंडारी, श्रीमती राखी व्यास, प्रदीप श्रीमाल, सुजान रांका, अभय रांका, राजेन्द्र लुणावत, भवानी सेरा,हिम्मतलाल गेलड़ा,रितेश गेलड़ा, शलभ अग्रवाल, गिरधारीलाल वर्धानी,सुशील मीनू माथुर, भगवान ढलवानी, आदि उपस्थित रहे। नेत्रम संस्था द्वारा शर्मा परिवार एवम लुणावत परिवार को प्रशस्ति पत्र भेंट कर सम्मानित किया गया। संस्था ने आह्वान किया कि अधिक से अधिक लोग नेत्रदान का संकल्प लें, ताकि किसी की मृत्यु किसी और की दृष्टि बनने का कारण बन सके।