
रतलाम, 7 नवम्बर । मानवता और सेवा की भावना का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मित्र निवास रोड निवासी स्व. कपूरचंद खिलोशिया की पुत्रवधू एवं श्री सूर्यकांत खिलोशिया की धर्मपत्नी श्रीमती ज्योति खिलोशिया के निधन उपरांत उनके परिजनों ने नेत्रदान कर दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में प्रकाश लाने का पुनीत कार्य किया।
इस नेत्रदान की प्रेरणा सुशील मीनु माथुर द्वारा दी गई, जिन्होंने दिवंगत की पुत्री भविशा तथा परिजन किशोर खिलोशिया, बिपिन खिलोशिया, दिलीप खिलोशिया जितेन्द्र खिलोशिया और भूपेश खिलोशिया को इस महान कार्य के लिए प्रेरित किया। परिजनों ने सहर्ष सहमति प्रदान कर सेवा और मानवता की मिसाल कायम की।नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत ने बताया कि परिजनों की सहमति मिलते ही गीता भवन न्यास के ट्रस्टी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल को सूचित किया गया। उनकी टीम मनीष तलाच और परमानंद राठौड़ ने तत्परता से पहुँचकर नेत्र संरक्षण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण किया।
नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान परिवारजनों, रिश्तेदारों, मित्रों एवं शुभचिंतकों ने स्वयं उपस्थित रहकर कार्निया संरक्षण की प्रक्रिया को देखा, भ्रांतियों को दूर किया और भविष्य में नेत्रदान का संकल्प दोहराया। इस अवसर पर नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत, सुशील मीनु माथुर, ओमप्रकाश अग्रवाल, भगवान ढलवानी, शिवम माथुर सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे। संस्था द्वारा दिवंगत के परिजनों को प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनकी उदारता एवं सहृदयता का सम्मान किया गया।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि श्रीमती ज्योति खिलोशिया का 7 नवम्बर को जन्मदिन भी था। उनके इस जन्मदिन पर किया गया नेत्रदान वास्तव में “जन्मदिन से पुनर्जन्म” का प्रतीक बन गया। नेत्रम संस्था ने समस्त नागरिकों से भावपूर्ण अपील की है कि वे भी नेत्रदान जैसे पुण्य कार्य में सहभागी बनें और समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने में सहयोग करें।