
रतलाम । मानवता और सेवा की भावना का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए जैन कालोनी निवासी स्व. पारसमल गुगलिया की धर्मपत्नी श्रीमती संगीता गुगलिया के निधन उपरांत उनके परिजनों ने नेत्रदान कर दो दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन में प्रकाश लाने का पुनीत कार्य किया।
इस नेत्रदान की प्रेरणा अमित जैन (जावरा), नीलेश मेहता (जावरा) द्वारा दी गई, जिन्होंने दिवंगत की पुत्री शालिनी- अश्विन मूणत ,देवर धन्नालाल गुगलिया, भतीजे प्रशान्त गुगलिया एवं परिजनों को इस महान कार्य के लिए प्रेरित किया परिजनों ने सहर्ष सहमति प्रदान कर सेवा और मानवता की मिसाल कायम की।
नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत ने बताया कि परिजनों की सहमति मिलते ही गीता भवन न्यास के ट्रस्टी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी.एल. ददरवाल को सूचित किया गया। उनकी टीम मनीष तलाच और परमानंद राठौड़ ने तत्परता से पहुँचकर नेत्र संरक्षण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूर्ण किया। नेत्रदान की प्रक्रिया के दौरान परिवारजनों, रिश्तेदारों, मित्रों एवं शुभचिंतकों ने स्वयं उपस्थित रहकर कार्निया संरक्षण की प्रक्रिया को देखा, भ्रांतियों को दूर किया और भविष्य में नेत्रदान का संकल्प दोहराया।
इस अवसर पर परिजन डाडमचंद गुगलिया, ज्ञानचंद गुगलिया, जीवन गुगलिया चेतन गुगलिया, अनिल मूणत नेत्रम संस्था के हेमंत मूणत, सुशील मीनु माथुर, ओमप्रकाश अग्रवाल, भगवान ढलवानी, नवनीत मेहता सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे। संस्था द्वारा दिवंगत के परिजनों को प्रशस्ति पत्र भेंट कर उनकी उदारता एवं सहृदयता का सम्मान किया गया।
नेत्रम संस्था ने समस्त नागरिकों से भावपूर्ण अपील की है कि वे भी नेत्रदान जैसे पुण्य कार्य में सहभागी बनें और समाज को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने में सहयोग करें।