अखिल भारतीय जैन दिवाकर मंच के प्रणेता राष्ट्र संत कमल मुनि कमलेश जी की प्रेरणा से वीरांगना अभिनंदन समारोह सम्पन्न

जावरा (अभय सुराणा) । अखिल भारतीय जैन दिवाकर मंच के प्रणेता राष्ट्र संत कमल मुनि कमलेश मारासाहब की प्रेरणा से बेगू चित्तौड़ में विरांगना अभिनंदन समारोह रखा गया । इसमें जैन समाज की सभी महिलाओं ने भाग लिया उनके चेहरे पर काफी खुशियां झलक रही थी उनके जीवन का यह नया अनुभव था विधवा नहीं वीरांगना है हम सभी जानते हैं कि पहले एक प्रथा चलती थी जिसे हम सती प्रथा कहते हैं जिसमें किसी स्त्री के पति के निधन के बाद उसे भी उसकी चिता के साथ जला दिया जाता था लेकिन सती प्रथा से भी अनन्त गुना ज्यादा खतरनाक है पति के मरने के बाद एक औरत को विधवा बोलना जो औरत अपने आत्मसम्मान के लिए दुनिया से लड़ रही है वह विधवा कैसी हो सकती है इस तरह विधवा नहीं वीरांगना नाम से जानी जाना चाहिए। भारतीय इतिहास वीरांगनाओं के अद्भुत उदाहरणो से भरा पड़ा हुआ है जब भी देश समाज या सम्मान की रक्षा की बात है हमारी नारिया पीछे नहीं हटती है इतिहास में ही नहीं बल्की आधुनिक भारत में भी हम कई विरांगनाएं देखते हैं आज की विरांगनाएं केवल युद्ध के मैदान में ही नहीं बल्की हर क्षेत्र में दिखाई देती हैं सीमा प्रति देश की रक्षा करती महिला सैनिक अंतरिक्ष में देश का नाम रोशन करती महिला वेज्ञानिक खेलों के मैदान में पदक जीती खिलाड़ी और समाज में बदलाव लाने वाली हर स्त्री एक वीरांगना हैं वीरांगना होने का अर्थ केवल तलवार उठाना ही नहीं है बल्की अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना सही के लिए खड़े होना और कठिन परिस्थितियों में भी हार ना मानना है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि यशोदा पुरोहित, कांस्टेबल शर्मिला किरण प्रेम जाट महावीर इंटरनेशनल के पूर्व अध्यक्ष प्रवीण जी लुहाड़िया व सचिव कैलाश धाकड़ व लोकेश भटेवरा उपस्थित थे। दिवाकर मंच की अध्यक्ष सरोज कावड़िया, सचिव प्रमिला सुराणा, सुशीला आंचलिया सुंदर देवी सिंघवी ,ललिता चोरड़िया व दीक्षा जैन के अथक प्रयास से प्रोग्राम को संचालित किया। कार्यक्रम का संचालन दीक्षा जैन व डॉली जैन भीलवाड़ा ने किया |