भूलने की सारी बाते याद है, इसी लिए जीवन मे विवाद है

रतलाम । नीमचौक स्थानक पर समकित के संग समकित यात्रा विषय पर प्रवचनकार आगमज्ञाता डॉ समकित मुनि जी मसा ने अपने व्यक्तव्य में कहा कि जब जब छोटी छोटी बातों को हम बड़ा बनाते है तब तब रिश्तों की उम्र कम होती है भूलना कोई बुरी बात नहीं है जनाब बहुत बेचेन रहते है वे लोग जिन्हे हर बात याद रहती है । रिश्ते कभी खत्म नहीं होते है, मरने के बाद भी खत्म नहीं होते है, जन्मों जन्म तक चलते है, रिश्ते केवल बनते बिगड़ते है खत्म नहीं होते । यदि दिल के दरवाजे मे एक के लिए भी नो एंट्री का बोर्ड है तो मोक्ष में एंट्री नहीं हो सकती है । जब दुनिया मे आए थे तब 24 घंटे की शांति लेकर आए थे और अब 2 मिनिट की शांति के लिए भी तरसते हो ।
पबजी खेल से भी खतरनाक है नफरत का खेल, नफरत का खेल जन्मो जनम के लिए खाना पीना सोना हराम कर देता है । प्रतिक्रमण मे हम 84 लाख जीवों से क्षमा मांगते है लेकिन अपने आस पास के जो विशेष ज्यादा से ज्यादा 84 व्यक्ति है उनसे हम दिल से क्षमा नहीं मांगते है तो एसा प्रतिक्रमण किस काम का । जिसके शिकवे शिकायत जुबां पर नहीं आते वो व्यक्ति दिल ही दिल मे दिल ही दिल सिसकने को मजबूर हो जाते है। रिश्तों मे वो ताकत होती है जो हमे मोक्ष के द्वार पर भी ले जा सकती है और नर्क के द्वार पर भी ।
जिस घर परिवार मे आप रह रहे हो उस परिवार की शांति के लिए दो कदम पीछे हटना पड़े मोन रहना पड़े तो उसे स्वीकार करो । उम्र से बड़ा होना बड़ी बात नहीं है, यदि परिवार मे बड़े बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है तो बड़प्पन दिखाओ, जरूरी नहीं की छोटे ही क्षमा मांगे बड़े भी क्षमा मांग कर विवाद को खत्म कर सकते है ।
कपड़े पर या साड़ी पर एक बूंद भी चाय की गिर जाए तो पहले हम उस कपड़े और साड़ी को साफ करते है फिर चाय पीते है, तो फिर कोई छोटा सा भी विवाद क्यो न हो जाए पहले उस विवाद को खत्म करो फिर दूसरा काम करो । समकित यात्री की दूसरी बहुत बड़ी विशेषता यह होती है की, उसके जीवन मे यह वाक्य की “में यह भूल नहीं सकता हुं” यह बहुत कम होता है, जब जब इस वाक्य का प्रयोग कड़वी यादों के संदर्भ मे करोगे तब तब रिश्तों मे मधुरता खत्म होती है, अगर सुखी रहना चाहते हो तो इस वाक्य को अपने शब्दकोश से डीलीट कर दो ।स्वाध्याय याद करने का कहते है तो आप कहोगे की याद नहीं होता कल याद करता हूँ और आज भूल जाता हु, लेकिन जो बाते भूलना चाहिए उन्हे बरसो बरस तक याद रखते हो, मतलब आपकी मेमोरी तो स्ट्रांग है, जिसे आप याद रखना चाहते हो उसे याद रख लेते हो । बरसो पहले शादी मे किसने कितना लिफाफा दिया क्या गिफ्ट दिया ये आपको याद रहता है । टेंशन डिप्रेशन की जो बीमारी है वो बुरी बातों को याद करने से ही होती है ।
छोटी बातों को बड़ा नहीं बनाना है, कंकर को पहाड़ नहीं बनाना है । आजकल तो कोई अपना नजदीकी जन्मदिन की बधाई देना भूल जाए तो मन मे कड़वाहट आ जाती है, अपने आप को टटोलो आपकी जीवन शैली तो एसी नहीं है । रिश्ते कभी खत्म नहीं होते है, मरने के बाद भी खत्म नहीं होते है, जन्मों जन्म तक चलते है, रिश्ते केवल बनते बिगड़ते है खत्म नहीं होते, रिश्ते चाहे खराब हो या अच्छे रिश्ते जन्मो जनम तक रहते है, गौतम गणधर और भगवान महावीर का रिश्ता क्रोड़ा क्रोडी जनम का रिश्ता था, और मधुर रिश्ता था आपके रिश्ते तो 10/20/40 साल के रहते है वो भी आप मधुर नहीं रख पाते हो । किसी से रिश्ता बिगाडऩा बहुत भारी पड़ेगा, हो सकता आज आप भारी हो, लेकिन निश्चित ही एक दिन एसा आएगा जब सामने वाला आप पर भारी पड़ेगा ।

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