जैन तीर्थ सम्मेदशिखर जी में गूंजेगा वैराग्य का महापर्व: 18 अप्रैल को भव्य जैनेश्वरी दीक्षा महामहोत्सव

श्री सम्मेदशिखर जी/(गिरीडीह) । जैन धर्म की तपस्या, त्याग और संयम की महान परंपरा को साकार करने वाला ऐतिहासिक क्षण अब समीप है। विश्व विख्यात जैन तीर्थ सिद्धक्षेत्र श्री सम्मेदशिखर जी की पावन धरा पर 18 अप्रैल 2026 को भव्य जैनेश्वरी दीक्षा महामहोत्सव का आयोजन होने जा रहा है। यह महोत्सव संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के परम प्रभावक शिष्य एवं गुणायतन प्रणेता झारखंड में जन्मे मुनि श्री 108 प्रमाणसागर महाराज के पावन सान्निध्य में संपन्न होगा।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मजागरण, वैराग्य और मोक्षमार्ग की ओर प्रेरित करने वाला दिव्य आध्यात्मिक पर्व है। दीक्षा के इस महाक्षण में साधक सांसारिक मोह-माया, परिवार, धन-संपत्ति और भौतिक सुखों का त्याग कर पूर्ण संयम, अनुशासन और धर्ममय जीवन का व्रत ग्रहण करेंगे। यह दृश्य न केवल भावुक होता है, बल्कि हजारों श्रद्धालुओं के अंतर्मन को झकझोर कर उन्हें आत्मचिंतन के लिए प्रेरित करता है।

15 अप्रैल को होगा मुनिसंघ का भव्य मंगल प्रवेश

महोत्सव की शुरुआत 15 अप्रैल 2026को प्रातःकाल गुणायतन में मुनि श्री 108 प्रमाणसागर महाराज ससंघ के मंगल प्रवेश से होगी। इस अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा भव्य अगवानी की जाएगी, जो पूरे आयोजन का आध्यात्मिक प्रारंभ होगा।

तीन दिन तक श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था

गुणायतन परिवार द्वारा देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 17 अप्रैल से 19 अप्रैल तक तीन दिनों की निःशुल्क आवास एवं भोजन व्यवस्था की गई है। यह सेवा भाव और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है, जिससे हजारों श्रद्धालु सहज रूप से इस महोत्सव में सहभागी बन सकेंगे।

रांची में चल रहा पंचकल्याणक महोत्सव

गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने जानकारी देते हुए बताया कि वर्तमान में मुनि श्री अपने संघ सहित रांची में विराजमान हैं, जहाँ 1 अप्रैल से 6 अप्रैल तक बिरसा मुंडा फन पार्क में 1008 जिनबिंब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी मुनिराज के सानिध्य में भव्य रूप से आयोजित हो रहा है। इस आयोजन में भगवान के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान और मोक्ष कल्याणकों का जीवंत चित्रण श्रद्धालुओं को धर्म के गूढ़ सिद्धांतों से जोड़ रहा है।
इस महोत्सव के उपरांत मुनि ससंघ मंगल विहार जैन तीर्थ श्री सम्मेदशिखर जी की ओर होगा मंगल विहार यात्रा भी श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत प्रेरणादायक होगी, जिसमें वे दर्शन, वंदना और सेवा का पुण्य अर्जित करेंगे, कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा बीरेंद्र जैन छाबड़ा कोडरमा ने बताते हुये कहा कि 15 अप्रैल 2026 को गुणायतन में मुनिसंघ का मंगल प्रवेश एवं अगवानी होगी,जिसकी तैयारी युद्ध स्तर पर चल रही है । 16 अप्रैल 2026 –को विशेष विधान एवं विविध धार्मिक अनुष्ठान होंगे। 17 अप्रैल 2026 – साधकों की अंतिम तैयारियाँ, आध्यात्मिक प्रवचन एवं तप-आराधना। 18 अप्रैल 2026 – आचार्य आज्ञानुसार भव्य जैनेश्वरी दीक्षा समारोह।
दीक्षा का दृश्य: त्याग और वैराग्य का चरम दृश्य अत्यंत मार्मिक और आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत होता है, जब साधक अपने परिजनों से विदा लेकर गुरु चरणों में समर्पित होते हैं, वह क्षण उपस्थित जनसमूह के लिए भाव-विभोर कर देने वाला होता है। यह त्याग और वैराग्य का ऐसा अद्वितीय उदाहरण होता है, जो जीवन के वास्तविक उद्देश्य—आत्मकल्याण और मोक्ष-की ओर प्रेरित करता है, इस इस ऐतिहासिक महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु, गुरु भक्त एवं धर्मप्रेमी सम्मिलित होंगे। विशाल पंडाल, सुव्यवस्थित प्रबंधन, प्रवचनों की श्रृंखला, भक्ति कार्यक्रम और धार्मिक अनुष्ठान इस आयोजन को भव्यता और दिव्यता प्रदान करेंगे।
गुणायतन परिवार की ओर से सी. ई. ओ. सुभाष जैन एवं मुख्य जनसंपर्क अधिकारी वीरेन्द्र जैन छाबड़ा ने आमंत्रण देते हुये समस्त श्रद्धालुओं से विनम्र अपील करते हुये कहा कि अपने परिवार सहित इस दिव्य महोत्सव में सहभागी बनें और शास्वत सिद्धक्षेत्र की बंदना एवं मुनि श्री का आशीर्वाद प्राप्त करें, यह महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मजागृति, संयम, त्याग और मोक्षमार्ग की ओर बढ़ने की प्रेरणा देने वाला दिव्य अवसर है, जो जैन समाज के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में अंकित होगा आपके आगमन की पूर्व सूचना देना आवश्यक है, जिससे आपकी संपूर्ण व्यवस्था की जा सके। उक्त जानकारी कोडरमा मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा ने दी।

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