साधना की वाइब्रेशन खरीदी और बेचीं नहीं जा सकती – राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश

आत्मा को पवित्र करने के लिए तपस्या और जाप की साधना अत्यंत जरूरी है – डॉ. वसंत विजय जी महाराज

कृष्णागिरी पार्श्वनाथ नाथ पद्मावती धाम। भक्ति और साधना से निकली हुई वाइब्रेशन स्वयं का कल्याण तो करती ही है साथ ही वह वाइब्रेशन पूरे ब्रह्मांड में हमेशा के लिए विद्यमान रहते हैंl जो अनंत काल तक अनंत आत्माओं को पवित्र करने के लिए सदैव उपयोगी बनते हैंl उक्त विचार राष्ट्र संत कमल मुनि जी कमलेश ने संबोधित करते कहा कि साधना की वाइब्रेशन खरीदी और बेचीं नहीं जा सकती। तीन लोक की संपत्ति दान देकर भी वाइब्रेशन का निर्माण नहीं किया जा सकता l
उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर साधना की जाती है वह धरती भी परमाणु से पवित्र हो जाती है पूजनीय और तीर्थ के रूप में बदल जाती है l उसमें जाने वाली भी उसे परिपूर्ण हो जाती है l मुनि कमलेश ने बताया कि बिना साधना की तीन कल में भी आत्मा पवित्र नहीं हो सकती ,विचार निर्मल नहीं हो सकते ,शरीर निरोग नहीं हो सकता, कर्मों की निर्जरा भी नहीं हो सकती हैl
राष्ट्र संत ने कहा कि स्वयं का कर्ज खुद को उतारना होता है ,वैसे ही स्वयं की साधना स्वयं को करनी पड़ती है दूसरों के भरोसे न रहते हुए स्वयं को पुरुषार्थ करना होगा l उसके लिए उचित मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है l
पद्मावती पीठाधीश्वर डॉ. वसंत विजय जी महाराज ने ने कहा कि जैसे कपड़े को साफ करने के लिए साबुन पानी दोनों आवश्यक होते हैं वैसे ही आत्मा को पवित्र करने के लिए तपस्या और जाप की साधना अत्यंत जरूरी है l
अंत में कहा कि एक जन्म का सवाल नहीं है एक सुधारा तो अनंत सुधर जाएंगे ,और एक बिगड़ा तो अनंत जन्म मरण बिगड़ जाएंगेl चार गति 84 लाख योनि में मनुष्य जन्म के अंदर ही विवेक पूर्वक साधना की जा सकती है दोनों महान संतों में वर्तमान समस्याओं पर खुलकर चर्चा हुई तीन दिन मुनि कमलेश यही विराजेंगे l

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