श्री दिगम्बर जैन समाज और मुनि श्री के सानिध्य में निर्वाण महोत्सव

गुरु महोत्सव के साथ मुनि श्री 108 धर्म सागर जी महाराज का तारीख अनुसार आज दीक्षा महोत्सव मनाया गया

झुमरीतिलैया। आज प्रातः श्री दिगम्बर जैन समाज के सानिध्य में जैन मंदिर में 1008 श्री शांतिनाथ भगवान का महमस्तिकाभिषेक ओर विशेष गुरु मुख से शांतिधारा कराया गया ।इसके बाद कार्यक्रम प्रारम्भ किया गया जिसमें सर्व प्रथम सौधर्म इंद्र प्रदीप -मीरा जैन छाबड़ा के द्वारा ध्वजारोहण किया गया इसके पश्चात मुनि श्री108 भाव सागर जी मुनीराज को कमंडल अर्पण करने का सौभाग्य प्रदीप -मीरा जैन छाबड़ा,संजय-बबिता जैन गंगवाल के परिवार को प्राप्त हुआ।इसके पश्चात समाधिस्थ जैन संत परम पूज्य आचार्य श्री 108 ज्ञान सागर जी मुनीराज ओर उनके परमप्रभावक शिष्य समाधिस्थ जैन संत हर दिल मे बसने वाले परमपूज्य प्रातः स्मरणीय आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज के चरण चिंह का प्राण प्रतिष्ठा नगर में प्रथम बार मुनि दय के द्वारा 84 मंत्रो के साथ पूजा पाठ आदि जाप के साथ किया गया,ओर अष्ठ कुमारी के द्वारा भी पूजन किया गया। ये चरण चिन्ह पाटनी परिवार आर. के.मार्बल किशनगढ़ (राजस्थान) के द्वारा दिया गया जो देवघर जैन मंदिर में स्थापित होंगे।
समाधिस्थ परम पूज्य
आचार्य श्री विद्यासागर जी महामुनिराज से दीक्षित एवं परमपूज्य आचार्य श्री108 समय सागर जी मुनीराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनिश्री 108 धर्म सागर जी मुनिराज ओर मुनि श्री 108 भाव सागर जी मुनिराज इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए
ने कहा कि , मेरा भी सौभाग्य है कि 22 वर्ष में प्रथम बार महाकवि परम पूज्य आचार्य श्री ज्ञान सागर जी महाराज के चरण चिह्न की प्रतिष्ठा का अवसर प्राप्त हुवा, इस तिथि में दीक्षित सभी मुनिराज स्वस्थ रहें एवं जिन शासन की प्रभावना करते रहें, 1008 श्री अभिनंदन नाथ भगवान का महोत्सव मनाया गया यह भी सौभाग्य की बात है,24 भगवान के मोक्ष कल्याणक महोत्सव मनाना चाहिए,मोक्ष की प्रस्तावना , कर्मों की समीक्षा , समता का उद्घाटन है, शून्य से शिखर तक की यात्रा है, आत्म उत्थान का मुकाम है, निर्माण से निर्वाण तक की यात्राहै दीक्षा, जितने भी साधु इस तिथि में दीक्षित हुए वह हमेशा स्वस्थ रहें जिनशासन की प्रभावना करते रहे,उन सभी को हम यहीं से नमस्कार करते हैं,84 करोड़ मंत्रों में सबसे बड़े महामंत्र में गुरु का नाम आता है, गुरु के माध्यम से हृदय का आंगन पवित्र हो जाता है, गुरु जी कहते थे गौशालाएं जीवित कारखाना है,विदेशी गुलामी का प्रतीक इंडिया नहीं हमें गौरव का प्रतीक भारत देश नाम चाहिए ओर हम सब को इंडिया नही भारत कहना है साथ ही हिन्दी भाषा मे बहुत जोर देते थे।
आज गुरु नही है मगर गुरु चरण ही हम सब के लिए पूज्य है इसलिये गुरु चरण की प्रतिष्ठा कर गुरु चरण विराजमान किया जा रहा है।इसके बाद गुरु पूजा सुबोध-आशा जैन गंगवाल के संगीतमय पूजन आचार्य छत्तीसी बिधान के द्वारा।किया।गया जिसमें 36 अर्घ्य के साथ श्री फल मंडप पर सभी भक्तों द्वारा चढ़ाया गया।ओर साथ ही निर्वाण लड्डू भी भक्तों के द्वारा प्रभु चरणों मे समर्पित किया गया। इन सभी कार्यक्रम में विशेष रूप से शामिल समाज के उप मंत्री नरेंद्र जैन झांझरी,जय कुमार जैन गंगवाल,ललित जैन सेठी,महिला समाज की अध्यश्रा नीलम जैन सेठी,मंत्राणी आशा जैन गंगवाल हुवे।
आज का आहार चर्या नया मंदिर तरफ सम्पन्न हुआ सभी कार्यक्रम स्थानीय पंडित अभिषेक शास्त्री द्वारा सम्पन्न हुआ।कल गुरु पूजा और मुनि श्री का दीक्षा महोत्सव तिथि अनुसार मनाया जाएगा। मीडिया प्रभारी राज कुमार जैन अजमेरा,नविन जैन ने दी ।

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