

रतलाम। शहर के विचक्षणा विद्यापीठ में रविवार को श्रद्धा और तकनीक का एक अनूठा संगम देखने को मिला। बीकानेर की आर्या मुक्ति प्रभा श्री जी के समाधि मरण पर आयोजित देशव्यापी डिजिटल श्रद्धांजलि सभा में रतलाम के सैकड़ों साधकों ने सामूहिक रूप से हिस्सा लिया। सत्य साधना केंद्र, बीकानेर के माध्यम से आयोजित इस ऑनलाइन शिविर ने रतलाम को देश के अन्य प्रमुख शहरों से आध्यात्मिक रूप से जोड़ दिया।
विचक्षणा विद्यापीठ में उमड़ा जनसैलाब
श्रद्धांजलि सभा का मुख्य केंद्र रतलाम का विचक्षणा विद्यापीठ रहा, जहाँ प्रातः 8:00 बजे से ही श्रद्धालुओं का जुटना शुरू हो गया था। कार्यक्रम में शहर के गणमान्य नागरिकों सहित समाज के विभिन्न वर्गों ने हिस्सा लिया। बीकानेर से सीधा प्रसारण करते हुए जेनाचार्य श्रीपूज्य श्री जिनचंद्र सुरिजी महाराज ने आर्या जी के तपस्वी जीवन पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मुक्ति प्रभा श्री जी का जीवन सादगी की मिसाल था और उनकी साधना का प्रकाश रतलाम सहित पूरे देश के साधकों को प्रेरित करता रहेगा।
सामूहिक साधना: ‘नासाग्र’ पर टिकी एकाग्रता
डिजिटल तकनीक के माध्यम से संचालित इस सत्र में रतलाम के साधकों ने एक घंटे तक ‘सत्य साधना’ का अभ्यास किया। ध्यान का मुख्य केंद्र ‘नासाग्र’ (नासिका के ठीक नीचे का स्थान) रहा, जहाँ साधकों ने अपनी आती-जाती सांसों पर ध्यान केंद्रित कर आत्मिक शांति की अनुभूति की।
इन केंद्रों पर भी हुए सामूहिक आयोजन
रतलाम जिले और आसपास के क्षेत्रों में इस डिजिटल आयोजन को लेकर भारी उत्साह देखा गया। जिले के प्रमुख केंद्रों में सामूहिक रूप से ध्यान शिविर आयोजित किए गए:
प्रमुख केंद्र: जावरा, ताल, नलखेड़ा, महिदपुर और उज्जैन।
अन्य क्षेत्र: इंदौर, बाजना और आसपास के ग्रामीण अंचलों से भी साधक वर्चुअली इस सभा से जुड़े।
गरिमामयी उपस्थिति
रतलाम में इस आयोजन को सफल बनाने में विचक्षण विद्यापीठ के उपाध्यक्ष मिलन दासोत एवं समिति का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम के दौरान शहर के प्रमुख समाजसेवी और गणमान्य जन उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से अमित कोठारी, नरेंद्र गोलछा, रविंद्र मालू, हेमंत बोथरा, कमल नयन लालन, जितेंद्र संचेती, सुरेंद्र मेहता, ओ.पी. मिश्रा, अविनाश पांडे प्राचार्य प्रखर कोठारी, प्रतीक कोठारी, श्रीमती विमलेश कोठारी, मिनाली कोठारी और हित्तल कोठारी शामिल थे।
समिति के सदस्यों ने बताया कि इस प्रकार के डिजिटल आयोजनों से समाज में एकता और आध्यात्मिकता का संचार होता है, जो आज के समय की महती आवश्यकता है।