“जीओ और जीने दो” का संदेश देते हुए जैन समाज ने पशु हिंसा के खिलाफ उठाई आवाज

जावरा (नि.प्र.)। जैन समाज एवं अहिंसा प्रेमियों द्वारा बकरीद के अवसर पर जीव दया, करुणा और अहिंसा का संदेश देते हुए पशु हत्या का विरोध किया गया। अ.भा. जैन दिवाकर विचार मंच के संस्थापक अध्यक्ष मोतीलाल बाफना राष्ट्रीय वरिष्ठ मार्गदर्शक अभय सुराणा ने कहा कि जैन धर्म का मूल सिद्धांत “अहिंसा” है और प्रत्येक जीव को जीने का समान अधिकार है।
संदेश में कहा गया कि बेजुबान पशु भी दर्द और पीड़ा महसूस करते हैं। त्योहार खुशियों और प्रेम का प्रतीक होना चाहिए, किसी निर्दोष जीव की बलि देकर नहीं। समाज ने लोगों से अपील की कि वे दया, करुणा और मानवता का परिचय देते हुए अहिंसा के मार्ग को अपनाएं।
पोस्टर के माध्यम से “जीओ और जीने दो”, “हर जीव अनमोल है” और “हिंसा पाप है” जैसे संदेश देकर समाज में शांति, प्रेम और सह-अस्तित्व की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया गया।
इस अवसर पर अ.भा. जैन दिवाकर विचार मंच के राष्ट्रीय वरिष्ठ मार्गदर्शक अभय सुराणा राष्ट्रीय महामंत्री अभय श्रीमाल राष्ट्रीय प्रचार मंत्री निलेश बाफना आदि ने कहा कि अहिंसा केवल धर्म नहीं, बल्कि मानवता की सबसे बड़ी पहचान है। उन्होंने सभी से जीवों के प्रति संवेदनशील बनने और करुणा का भाव रखने का आह्वान किया।
“खुशी मनाएं, लेकिन किसी की जान लेकर नहीं — दया और करुणा से दुनिया को बेहतर बनाएं।”

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