- पांचसौ तेरह आयम्बिल के पूर्ति दिवस पर वंदन- अभिनंदन, तप- अनुमोदना
- प्रस्तुति:- विजय कुमार लोढ़ा निम्बाहेड़ा( बेंगलूरू)

मध्य प्रदेश के गांव जीरन ( जिला नीमच) में बरोरिया परिवार में जन्मी महासती श्री अरुण प्रभा जी जीनके आज अनवरत पांच सौ तेरह आयम्बिल का पूर्ति दिवस है! राजस्थान संघ अहमदाबाद के तत्वाधान में तपपूर्ति समारोह महासती जी की तप अनुमोदना हेतु दिनाकं 31 मई रविवार 2026 को आयोजित किया गया है!
उदयपुर में मालव सिंहनी कमलावती जी से सन 1980 की शरद पूणिमा के दिन संयम ग्रहण करने के बाद ही आपने संयमी जीवन में तप के क्षेत्र में कदम बढ़ाया! आपने आठ लगातार वर्षीतप किये!
एक बार 47 दिवसीय तपस्या, दो बार41 दिवसीय तपस्या आदि कई बड़ी तपस्या की! पिछले कई वर्षो से आयम्बिल तप आराधना में रत है!
180 आयम्बिल एक बार,120 आयम्बिल9 बार दो मासी आयम्बिल व एक मासी आयम्बिल कई बार किये!
आयम्बिल तप में, अनपूर्वी तप, सर्वतोभद्र तप, वर्धमान ओली 45 तक, रत्नावली तप, एवम 12 वर्ष6 माह का विशेष आयम्बिल तप गतिमान है!
आपके आज513 वे आयम्बिल का पूर्ति समारोह व पारणा दिवस है! स्वास्थ की अनुकुलता नही होने के कारण चिकित्सको के परामर्श पर व संघ के अनुरोध पर आप पारणा कर रहे है!
आपके तपकी अनुमोदना करते हुए प्रवर्तक श्री रमेश मुनिजी, प्रवर्तिनी डा. चंदना जी म.सा. एवम आचार्य डा. शिव मुनि जी ने तप चक्रेश्वरी, तप वीरांगना, तप रत्ना की उपाधी से अलकृंत किया है!
गुरु जैन दिवाकर पर अटूट श्रद्धा
महासती जी यह मानती है कि मेरे उपर गुरु जैन दिवाकर व गरुणी कमला वती जी की असीम कृपा है इससे में इतना कर पाती हूं! महासती जी का परम प्रिय स्तवन
सच कहती हूं भक्तो उद्धार होजायेगा.
सुमिरण करो चौथमल जी का उद्धार होजायेगा
इस गीत के साथ जब महासती प्रवचन प्रारम्भ करती है, पुरी धर्म सभा गुरु भक्ति में सरोबार हो जाती है!
आगम मय प्रवचन
आप उत्कृष्ठ तप की आराधना तो करती है पर आपका प्रवचन भी सुमधुर व आगम मय होता है! आपके श्री मुख से तीर्थकर के समवसरण की रचना पर दिया उद्बोधन बहुत ही अद्वितिय है!
उप प्रवर्तीनी पद
4 सितम्बर 2022 को रतलाम चतुर्मास में आचार्य प्रवर डा. शिव मुनि जी ने आपको उप प्रवर्तीनी पद से विभूषित किया!
छोटे- बड़े सभी का ध्यान
आपमें सबसे बड़ा गुण हैं जंहा पर भी आप विराजमान रहते है संघ के प्रत्येक सदस्य पर आपका स्नेह भाव रहता है! संघ का गौरव बढे व परस्पर प्रेम रहे यह सदैव प्रयास रहता है!
मांगलिक का विशेष प्रभाव
आपके द्वारा दी गई मांगलिक का विशेष प्रभाव रहता है यह मैंने स्वयम अनुभव किया है!
विनय का जबरदस्त गुण
आप अपनी गुरुणी जी के देवलोक गमन होने के बाद बड़ी गुरु बहिन उप प्रवर्तीनी सत्य साधना जी के साथ रहे तथा उन्हे गुरुणी के रूप में माना!
आपकी शिष्यायें शतावधानी महासती श्री गुरुकिर्ती जी, गुरुनिधी जी, तपस्वीनी जी महासती श्री अरुण किर्ती जी भी विनयवान, विवेक शील है! तथा सदैव ज्ञान सीखना व सीखाने में व्यस्त रहते है! पिछले चार वर्षों से धार्मिक शिविर का आयोजन कर रहे है!
गुरुणी की कृपा
वैसे महासती जी से परिचय बहुत पुराना था पर उनके 2013 के निम्बाहेड़ा वर्षावास से उनकी विशेष कृपा मेरे पर पुरे परिवार पर व संघ पर रही! आज 513 वें आयम्बिल पूर्ति दिवस पर ह्रदय की अनन्त आस्था के साथ वंदन- अभिनंदन! आप स्वस्थ रहे, इसही तरह आपकी जिन शासन की प्रभावना करते हुए गुरु दिवाकर के नाम को महकाते रहे! आपकी कृपा लोढ़ा परिवार एवम संघ- समाज पर बनी रहे!
विजय लोढ़ा एवम परिवार निम्बाहेड़ा( बेंगलूर- पूणे)