ग्रीनफील्ड रोड को लेकर जावरा में बढ़ा विरोध, किसान-व्यापारी संघर्ष समिति ने प्रशासन पर लगाए आदेशों की अवहेलना के आरोप

जावरा। जावरा शहर से प्रस्तावित ग्रीनफील्ड रोड को निकालने के विरोध में पीड़ित प्रभावित किसान, व्यापारी एवं जन संघर्ष समिति ने सोमवार को अनुविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) जावरा को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन एवं संबंधित विभागों पर न्यायालय और कलेक्टर के आदेशों की अवहेलना करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। समिति ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री, मुख्यमंत्री, कलेक्टर रतलाम तथा एमपीआरडीसी के अधिकारियों को भी ज्ञापन की प्रतिलिपि भेजकर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है।
समिति का आरोप है कि जनप्रतिनिधियों, प्रभावित किसानों, व्यापारियों एवं सामाजिक संगठनों की आपत्तियों के बाद जिला प्रशासन द्वारा पूर्व में स्वीकृत रोड अलाइनमेंट निरस्त कर नया अलाइनमेंट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। इसके बावजूद 1 जून 2026 तक संबंधित आदेशों का पालन नहीं किया गया, जिससे प्रभावित लोगों में भारी नाराजगी है।
ज्ञापन में कहा गया है कि ग्रीनफील्ड रोड का उद्देश्य शहरों के बाहर से यातायात को निकालकर आवागमन को सुगम बनाना होता है, जबकि जावरा शहर के बीच से सड़क निकालने का प्रस्ताव मूल उद्देश्य के विपरीत है। समिति का कहना है कि यदि सड़क घनी आबादी वाले क्षेत्र से निकाली गई तो शहर दो हिस्सों में बंट जाएगा तथा सैकड़ों मकान, दुकानें और लोगों के रोजगार प्रभावित होंगे।
समिति ने दावा किया कि जावरा लगभग 7 किलोमीटर लंबा घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां हजारों परिवार निवास करते हैं। प्रस्तावित मार्ग रेलवे नियमों, नगर पालिका की आपत्तियों और विभिन्न तकनीकी मानकों के भी विपरीत बताया गया है। ज्ञापन के अनुसार नगर पालिका द्वारा विशेष बैठक में प्रस्ताव पारित कर ग्रीनफील्ड रोड को शहर के बाहर से निकालने की अनुशंसा की जा चुकी है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि ग्रीनफील्ड नियंत्रित राजमार्ग की चौड़ाई लगभग 200 से 230 फीट होती है तथा राजमार्ग नियंत्रण अधिनियम के तहत सड़क के दोनों ओर निर्माण संबंधी प्रतिबंध लागू होते हैं। ऐसे में यदि सड़क शहर के भीतर से गुजरती है तो बड़ी संख्या में मकान और व्यावसायिक प्रतिष्ठान प्रभावित हो सकते हैं।
समिति ने विधायक डॉ. राजेंद्र पांडे द्वारा भी कलेक्टर को शहर के बाहर बायपास मार्ग का प्रस्ताव देने का हवाला देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों और नगर पालिका का समर्थन भी शहर के बाहर से सड़क निकालने के पक्ष में है। समिति ने हुरोन टेकरी से हिंगलाज माता क्षेत्र तक के नक्शे, डिजाइन, टेंडर दस्तावेज तथा अन्य साक्ष्य होने का दावा किया है।
पीड़ित प्रभावित किसान, व्यापारी एवं जन संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों की अनदेखी कर शहर के भीतर से सड़क निर्माण का प्रयास किया गया तो प्रभावित लोगों को मानसिक, सामाजिक एवं आर्थिक नुकसान होगा, जिसकी जिम्मेदारी संबंधित विभागों और प्रशासन की होगी।
समिति ने स्पष्ट किया कि वह विकास के विरोध में नहीं है, बल्कि नियमों और जनहित के अनुरूप समाधान चाहती है। ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से निष्पक्ष न्याय करते हुए ग्रीनफील्ड रोड को शहर के बाहर से निकालने तथा प्रभावित लोगों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की गई है।

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