कोटा के श्री जैन नवरत्न ग्रुप को मिला आस्था सम्मान 2026 – प्रतिवर्ष एक सामाजिक संगठन को पुरस्कृत करेगा शीतल तीर्थ

रतलाम । किसी भी सामाजिक समूह के अपने अपने उद्देश्य होते है जिन्हें लेकर उनका गठन किया जाता है । पर जब कोई संगठन बिना किसी अपेक्षा से केवल अपने उद्देश्य के प्रति आस्थावान रहता है तब वह सम्मान का पात्र बन जाता है ऐसे ही निस्वार्थ सेवा भावी संगठनों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से शीतल तीर्थ रतलाम द्वारा आचार्य श्री योगिन्द्र सागर जी महामुनिराज के आशीर्वाद एवं क्षेत्र अधिष्ठात्री डॉ सविता दीदी के निर्देशन में वर्ष 2026 से आस्था सम्मान की शुरुआत की गई।
क्षेत्र ट्रस्टी महावीर गांधी ने जानकारी देते हुए बताया कि साधको की साधना में सहयोग के साथ जीवदया के उपक्रमों को जोड़ते हुए आचार्य श्री योगिन्द्र सागर जी की प्रेरणा से शीतल तीर्थ की स्थापना की गई थी। जो आज भी अनवरत है । प्रतिवर्ष 14 जून को धामनोद के पास स्थित श्री दिगम्बर जैन धर्मस्थल शीतल तीर्थ रतलाम पर क्षेत्र के शिलान्यास, पूज्य गुरुदेव के रिद्धि दिवस एवं आचार्य शीतल कीर्ति गुरुदेव के जन्म दिवस की लब्धि समारोह के रूप में मनाया जाता है ।
इस वर्ष भी आयोजन हेतु सिद्धक्षेत्र गिरनार के पीठाधीश क्षुल्लक 105 श्री समर्पण सागर जी एवं क्षुल्लक 105 श्री विश्व मार्दव सागर जी का मंगल सानिध्य प्राप्त हुआ ।
प्रातःकाल अतिशयकारी चांदखेड़ी वाले बाबा चैत्यालय का पंचामृत अभिषेक किया गया एवं रिद्धिकारक श्री 1008 श्री ऋषिमंडल विधान की अर्चना की गई ।
दोपहर को गुरु गुणानुवाद सभा का आयोजन किया गया । जिसमें सारस्वत अतिथि के रूप में इंदौर से डॉ अनुपम जैन एवं कोटा से राकेश जैन ‘चपलमन’ उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान देव शास्त्र गुरु के प्रति निस्वार्थ भाव से सेवा कार्य से जुड़े रहने वाले कोटा के युवा संगठन श्री जैन नवरत्न ग्रुप को आस्था सम्मान से सम्मानित करते हुए प्रशस्ति पत्र भेंट किया । इस प्रसंग पर क्षुल्लक श्री समर्पण सागर जी ने पूज्य गुरुदेव योगिन्द्र सागर जी की स्मृतियों को जीवंत करते हुए कहा कि इस जैन श्रमण परम्परा में ऐसा साधक न आज तक हुआ है और न आगे होगा । जिन्होंने उत्कृष्ट मुनिचर्या का पालन करते हुए साधना से सिद्धि की प्राप्ति की ओर लाखों जैन जैनेतर बंधुओं के दुखों का निवारण किया । उनकी गाई जिनवाणी आज भी लाखों भक्तों के मुख पर विद्यमान है । ओर इस क्षेत्र के विकास में जो सबसे महत्वपूर्ण भूमिका सविता दीदी की है उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता क्योंकि एक नारी होकर जिन्होंने ऐसे नवोदित तीर्थ को नींव से लेकर शिखर तक पूर्ण आकार प्रदान किया है यह भी इतिहास में लिखा जाएगा ।
डॉ अनुपम जैन ने सभी साधर्मियो से शीतल तीर्थ प्रभावना में योगदान देने हेतु प्रेरित किया। आयोजन में इंदौर,उज्जैन, जावरा,कोटा, जयपुर, भिंड, सागवाड़ा, बांसवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों के गुरु भक्तों ने भाग लिया । उक्त जानकारी तीर्थ प्रवक्ता राकेश पोरवाल ने दी ।

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