जैन सोशल ग्रुप रतलाम ग्रेटर की 96 वयस्क और 3 बच्चे कुल 99 श्रद्धालुओं के साथ श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ तीर्थ यात्रा श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ सम्पन्न

रतलाम। जैन सोशल ग्रुप रतलाम ग्रेटर द्वारा आयोजित श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ तीर्थ यात्रा परमात्मा की असीम कृपा एवं सभी श्रद्धालुओं के सहयोग से अत्यंत सफल, सुव्यवस्थित एवं आनंदमय वातावरण में सम्पन्न हुई। लगभग 99 श्रद्धालुओं ने इस आध्यात्मिक यात्रा में सहभागिता कर विभिन्न पावन जैन तीर्थों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त किया तथा धर्म, भक्ति और आत्मिक शांति का अनुपम अनुभव किया।
यात्रा का शुभारंभ पावापुरी जीव मैत्रीधाम से हुआ, जहाँ के शांत एवं प्राकृतिक वातावरण ने यात्रियों को आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत कर दिया। इसके पश्चात श्रद्धालुओं ने श्री जीरावला पार्श्वनाथ तीर्थ में दर्शन कर वहाँ की महलनुमा एवं रिसॉर्ट जैसी उत्कृष्ट आवासीय व्यवस्था का आनंद लिया। आगे 72 जिनालय, भीनमाल की भव्यता, भाण्डवपुर तीर्थ की दिव्यता तथा अरावली पर्वतमाला की गोद में विराजमान श्री नाकोड़ा पार्श्वनाथ भगवान और नाकोड़ा भैरव के अलौकिक दर्शन ने सभी श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
यात्रा के दौरान जालोर जैन मंदिर, कमल विहार, श्री मुनिसुव्रत स्वामी की मनोहारी प्रतिमा एवं रात्रिकालीन भक्ति का दिव्य वातावरण यात्रियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इसके अतिरिक्त श्री मुच्छाला महावीर, सोनाणा खेतलाजी तथा यात्रा के अंतिम चरण में नाथद्वारा श्रीनाथजी के मंगलमय दर्शन कर सभी श्रद्धालुओं ने आध्यात्मिक लाभ प्राप्त किया।
पूरी यात्रा के दौरान यात्रियों में अनुशासन, सेवा-भाव, आपसी स्नेह एवं धार्मिक उत्साह का अद्भुत समन्वय देखने को मिला। भक्ति, सामूहिक आराधना, नवकार मंत्र के जाप एवं तीर्थों की दिव्यता ने यात्रा को सभी के लिए अविस्मरणीय बना दिया।
ग्रुप के अध्यक्ष सन्दीप चौरड़िया ने यात्रा की सफलता पर सभी यात्रियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज में संस्कार, एकता और आध्यात्मिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं। सचिव यशवन्त पावेचा ने यात्रा को सफल बनाने में प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सहयोग देने वाले उपाध्यक्ष निलेश गोधा,सचिव प्रमोद धींग और कोषाध्यक्ष जितेश गैलडा और सभी सदस्यों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
यात्रा के सफल संचालन में यात्रा संयोजक निलेश पोरवाल, देवेन्द्र कोचर, पारस कोठारी एवं जितेन्द्र लुनिया का विशेष योगदान रहा। उनकी उत्कृष्ट योजना, समन्वय एवं व्यवस्थाओं की यात्रियों ने मुक्तकंठ से सराहना की।
यात्रा के समापन पर सभी श्रद्धालु अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभूतियों, मधुर स्मृतियों एवं पुनः ऐसी ही तीर्थयात्राओं में सम्मिलित होने के संकल्प के साथ अपने-अपने गंतव्य के लिए रवाना हुए।

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