
रतलाम । श्री हरिहर सेवा समिति रतलाम एवं कालिका माता सेवा मंडल ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में अनंत श्री विभूषित केशवपुर पीठाधीश्वर, पूज्य महामंडलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्दजी महाराज का अवतरण दिवस वह श्री कालिका माता अन्न क्षेत्र का 36 वॉ स्थापना दिवस स्थानीय कालिका माता सत्संग सभागृह में श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। प्रारंभ में मां कालिका माता व स्वामी चिदम्बरानंद सरस्वती जी के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर आरती की गई।
इस अवसर पर रतलाम विकास प्राधिकरण (आरडीए) के अध्यक्ष श्री मनोहर पोरवाल ने कालिका माता सेवा मंडल द्वारा किए जा रहे धार्मिक एवं सेवा कार्यों की सराहना करते हुए पूज्य स्वामीजी के रतलाम प्रवास के दौरान मंडल द्वारा प्रदान की गई सेवाओं का भावपूर्ण स्मरण किया। उन्होंने कहा कि संतों का सान्निध्य समाज को सदाचार, सेवा और संस्कारों की दिशा प्रदान करता है।
प्रभुप्रेमी संघ के पूर्व अध्यक्ष श्री कैलाश व्यास ने पूज्य स्वामी चिदम्बरानन्दजी महाराज के दिव्य व्यक्तित्व एवं आध्यात्मिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रकृति समय-समय पर कुछ विशिष्ट आत्माओं को ईश्वरीय कार्यों के लिए पृथ्वी पर भेजती है। ऐसे महापुरुष अपने बाल्यकाल से ही धर्म, संस्कृति और लोकमंगल के प्रति अपनी विशेष अभिरुचि एवं समर्पण का परिचय देने लगते हैं। आदि शंकराचार्य, स्वामी विवेकानन्द, आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरिजी महाराज तथा महामण्डलेश्वर स्वामी चिदम्बरानन्दजी महाराज इसके प्रेरक उदाहरण हैं।
श्री व्यास ने बताया कि पूज्य स्वामीजी को उनके पूज्य पिताश्री ने मात्र सात वर्ष की आयु में ही अपने सद्गुरु पूज्य स्वामी हरिहरानन्दजी महाराज की सेवा एवं संरक्षण में समर्पित कर दिया था। हिमालय की कठोर साधना के दौरान एक समय उनके चरण निष्क्रिय हो गए थे तथा चिकित्सकों ने उपचार की संभावना से भी इनकार कर दिया था। किंतु ईश्वरीय कृपा से एक अज्ञात संत वहाँ प्रकट हुए और उन्होंने कहा कि यह युवा संन्यासी भारतीय संस्कृति एवं सनातन धर्म के लिए महान कार्य करने वाला है। संत के स्पर्श मात्र से स्वामीजी पुनः स्वस्थ होकर खड़े हो गए। यह घटना उनके जीवन की दिव्य आध्यात्मिक यात्रा का महत्वपूर्ण अध्याय है।
उन्होंने आगे बताया कि पूज्य स्वामीजी ने विजयपुर में एक माह तक निरंतर खड़े रहकर कठिन तपस्या की तथा भंडूच में नेत्र बंद कर गहन साधना करते हुए निरंतर धर्मोपदेश प्रदान किए। उनका संपूर्ण जीवन तप, त्याग, सेवा और करुणा का अनुपम उदाहरण है। स्वामीजी का सरल, सहज एवं संवेदनशील व्यक्तित्व नवनीत (मक्खन) की कोमलता के समान है, जो प्रत्येक व्यक्ति को आत्मीयता एवं प्रेम का अनुभव कराता है।
कार्यक्रम में हरिहर सेवा समिति एवं कालिका माता सेवा मंडल ट्रस्ट की ओर से आरडीए अध्यक्ष मनोहर पोरवाल, उपाध्यक्ष गोविन्द काकानी तथा सदस्यगण राजेंद्र गोयल, राजेंद्र मौर्य, धीरज व्यास, राखी व्यास, किरण महावर, एडवोकेट कैलाश व्यास एवं गणमान्य नागरिकों का स्वागत एवं अभिनंदन शाल श्रीफल भेंट कर किया गया।
इस अवसर पर प्रभुप्रेमी संघ के अध्यक्ष हरीश सुरोलिया, समन्वय परिवार के श्री शिवराम शर्मा, कालिका माता सेवा मंडल ट्रस्ट
अध्यक्ष राजाराम मोतियानी, उपाध्यक्ष मोहनलाल भट्ट, सचिव हरीश कुमार बिंदल, पूरणमल अग्रवाल, राधावल्लभ पुरोहित, राजेंद्र शर्मा, पुरण चोइथानी, बृजेश सक्सेना, चिराग ,मोहनलाल कसेरा, विश्वदीप टंडन, वीणा गोयल ,मनोरमा, पुष्पा व्यास, माया बक्शी, किरण शर्मा पदाधिकारी, सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन उपस्थित रहे।कार्यक्रम उपरान्त भोजन प्रसादी का आयोजन हुआ ।
कार्यक्रम का संचालन हरीश कुमार बिंदल ने किया तथा अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं ने पूज्य स्वामीजी के दीर्घायु, स्वस्थ एवं सतत लोककल्याणकारी जीवन की मंगलकामना की।