भाषाएं सभ्यताओं और इंसानों के बीच पुल बनाती हैं – प्रो. चौहान

जनवादी लेखक संघ की तरही गोष्ठी आयोजित

रतलाम। भाषाएं सभ्यताओं और संस्कृतियों के बीच एक पुल का निर्माण करती हैं । कोई भी भाषा किसी इंसान को इंसान से जुदा नहीं करती । उनके बीच भेद नहीं करती । वह इंसानों को मिलाती है। हिंदी और उर्दू दोनों भाषाएं हमारी जीवन शैली में शामिल हैं । इन भाषाओं की रचनाएं हमारी परंपराओं से आई हैं । इन रचनाओं को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए इस तरह के आयोजन महत्वपूर्ण होते हैं ।
उक्त विचार वरिष्ठ कवि और अनुवादक प्रो. रतन चौहान ने जनवादी लेखक संघ, उर्दू विंग रतलाम द्वारा आयोजित तरही नशिस्त की अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किए । उन्होंने कहा कि एक रचनाकार जीवन का सौंदर्य देखता है । वह इंसान के संघर्ष को देखता है फिर उसकी अभिव्यक्ति करता है । उसकी अभिव्यक्ति का माध्यम कोई भी भाषा हो सकती है , मगर इसका उद्देश्य मनुष्यता की रक्षा करना होता है। अमीर खुसरो से लेकर आज तक की काव्य परंपरा में भाषाओं का समन्वय हमारे देश की पहचान रहा है।
जलेसं उर्दू विंग के प्रदेश संयोजक सिद्धीक़ रतलामी ने कहा कि जलेसं द्वारा तरही नशिस्त का सिलसिला शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि तरही मिसरा वह निर्धारित पंक्ति होती है जो मुशायरे या काव्य गोष्ठी में आयोजक की तरफ से दी जाती है। सभी कवियों को उसी पंक्ति में दिए गए काफ़िया (तुकांत शब्द) और रदीफ़ (दोहराए जाने वाले शब्द) का पालन करते हुए अपनी ग़ज़ल लिखनी होती है। यह सुखद है कि रतलाम में इस तरह की गोष्ठियों का आयोजन निरंतर होता रहा है।
युवा शायर आशीष दशोत्तर ने कहा कि भाषाएं हमें समृद्ध करती हैं । ये हमें रचनात्मकता से जोड़ती हैं । इन भाषाओं से जुड़कर ही हम अपने जीवन में सभ्यता और संस्कृति को सहेजने का साहस कर पाते हैं।

इन्होंने पढ़ी रचनाएं
गोष्ठी में ‘ वक़्त आएगा इंतज़ार करो ‘ मिसरे पर सिद्दीक़ रतलामी, अब्दुल सलाम खोकर , डॉ. फ़रीद शेख़, अमीरूद्दीन अमीर, डॉ. वसीम वाहिद , डॉ. तौफीक़ , निसार पठान , शरीफ खोकर , शादाब ख़ान , सोहेल रतलामी, फ़ैसल रतलामी, ईश्वर लाल पुरोहित, विनोद झालानी,पुष्पलता शर्मा, हरिशंकर भटनागर, अनीस खान, गौरीशंकर खींची, दिलीप जोशी, श्याम सुंदर भाटी ने रचनाएं पढ़ीं।

इनकी रही मौजूदगी
गोष्ठी में रंगकर्मी ओमप्रकाश मिश्र, वरिष्ठ हास्य कवि जुझार सिंह भाटी, मांगीलाल नगावत, डॉ.एन. के .शाह ,आशा श्रीवास्तव, एस.के. मिश्रा, अशोक कुमार शर्मा, संजय परसाई ‘सरल’ मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन आशीष दशोत्तर ने किया । आभार प्रदर्शन जनवादी लेखक संघ सचिव रणजीत सिंह राठौर ने किया।