
रतलाम। मंगलम सिटी निवासी स्वर्गीय सरदार हरदेव सिंह इच्छप्राणी की धर्मपत्नी एवं सरदार इकबाल सिंह इच्छप्राणी की माताजी बीबी नरिंदर कौर जी के आकस्मिक निधन के उपरांत उनके परिजनों ने नेत्रदान कराकर मानवता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की। उनके इस प्रेरणादायी निर्णय से दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी का संचार होगा।
नेत्रदान के लिए सुशील मीनू माथुर एवं जसपाल बग्गा ने परिवारजनों को प्रेरित किया। सूचना मिलते ही नेत्रम संस्था एवं गीता भवन न्यास, बड़नगर की टीम सक्रिय हो गई। गीता भवन न्यास, बड़नगर के न्यासी एवं नेत्रदान प्रभारी डॉ. जी. एल. दादरवाल ने मोहनलाल राठौड़ के सहयोग से सफलतापूर्वक नेत्रदान की प्रक्रिया सम्पन्न कराई।
इस अवसर पर हेमन्त मूणत, ओमप्रकाश अग्रवाल, नवनीत मेहता, शलभ अग्रवाल, सुशील मीनू माथुर, प्रणय सोनी एवं नरेन्द्र प्रजापति उपस्थित रहे। सभी ने शोकाकुल परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएँ व्यक्त करते हुए उनके इस महान एवं प्रेरणादायी निर्णय की मुक्तकंठ से सराहना की।
नेत्रम संस्था के हेमन्त मूणत ने बताया कि नेत्रदान मानवता की सबसे महान सेवाओं में से एक है। किसी व्यक्ति के निधन के बाद उसके नेत्र दो नेत्रहीन व्यक्तियों के जीवन में नई रोशनी प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि मृत्यु जीवन का अंतिम सत्य है, लेकिन नेत्रदान के माध्यम से हम अपने जाने के बाद भी किसी के जीवन में आशा और उजाला छोड़ सकते हैं।
उन्होंने आमजन से अपील की कि वे अपने परिवार के साथ नेत्रदान का संकल्प लें तथा इस पुनीत कार्य के प्रति समाज में अधिक से अधिक जागरूकता फैलाएँ। हेमन्त मूणत ने बताया कि नेत्रम संस्था द्वारा रतलाम शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में लगातार नेत्रदान जागरूकता अभियान संचालित किए जा रहे हैं। संस्था का उद्देश्य अधिक से अधिक लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करना है, ताकि कोई भी नेत्रहीन व्यक्ति केवल कॉर्निया की कमी के कारण दृष्टि से वंचित न रहे।
अंत में नेत्रम संस्था ने दिवंगत बीबी नरिंदर कौर जी को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की तथा उनके इस प्रेरणादायी निर्णय को समाज के लिए अनुकरणीय बताया।