यह पाठशाला नही… संस्कारों की प्रयोगशाला है

रतलाम । आचार्य भगवन श्री रामलाल म. सा., उपाध्याय प्रवर श्री राजेशमुनिजी म. सा.एवं चारित्रशील आत्माओं की सद्प्रेरणा से श्री साधुमार्गी जैन संघ द्वारा संचालित लक्कड़पीठा पाठशाला संस्कारों के नित्य नए प्रयोग कर समाज में को रोज नए संदेश प्रदान कर रही है ।
इस पाठशाला के बच्चें प्रति माह प्राप्त होने वाली प्रोत्साहन राशि का जिस तरह से सदुपयोग लगातार कई वर्ष से रहे है वह अद्भुत है ,पूर्व में बच्चों ने इस राशि का सदुपयोग गौशाला में, मूक-बधिर बच्चों को सहयोग में ,निराश्रितों को भोजन कराने में किया और अभी कुछ समय पूर्व ही इन्होंने संघ की दान पेटी योजना में भाग लेकर अपनी प्रोत्साहन राशि को अपने कोमल हाथों से दानपेटी में दान किया। और आज तो उन्होंने संस्कारों के आकाश को ही छू लिया… जिन नन्हें – नन्हें बच्चों को यह भी नहीं पता कि उनके साथ पढ़ रहे बच्चों की शिक्षण व्यवस्था कैसे होती है, उन्होंने अपने संस्कारों के हंस पर सवार होकर एक नई उड़ान भर ली। श्री मनसुख जी चोपड़ा द्वारा संचालित शैक्षणिक सहयोग योजना में इन बच्चों ने अपनी शिक्षिकाओं के मार्गदर्शन में दो बच्चों को शैक्षणिक रूप से गोद लिया और उनके शिक्षा खर्च राशि में सहयोग करने का बीड़ा उठाया और आज पाठशाला परिसर में श्री मनसुखजी चोपड़ा को आमंत्रित करके अपने नाजुक हाथों से उत्साह और गर्वित मुस्कान के साथ ये राशि प्रदान की । इस अवसर पर बच्चे जब राशि प्रदान कर रहे थे तो उनकी गर्वित मुस्कुराहट को देखने का आनंद अविस्मरणीय रहा .साथ ही जब नन्हें- नन्हें बच्चों ने अपनी मासूमियत भरी वाणी और अंदाज से दान की महिमा और उन्हें मिली प्रेरणा के बारे में बोलना शुरू किया तो पलकों की कोर भींग गई. ऐसा लगा कि शायद कोई देवीय शक्ति अपनी मधुर आवाज में पूरे समाज को एक नया संदेश दे रही है ।
इस अवसर पर पधारे श्री मनसुखजी चोपड़ा तो अभिभूत हो गए उन्होंने न सिर्फ बच्चों को आशीर्वाद दिया बल्कि कहा कि आज बच्चों ने मेरे प्रकल्प को एक नई दिशा दे दी है. इस अवसर पर संघ के राष्ट्रीय मंत्री एवं रतलाम संघ अध्यक्ष श्री विनोद जी मेहता, पूर्व राष्ट्रीय मंत्री श्री कमलजी पिरोदिया, पाठशाला मध्य प्रदेश अंचल संयोजक श्री प्रकाशजी बोहरा ,पाठशाला के आश्रयदाता श्री योगेशजी लसोढ़, पाठशाला की आशीर्वाद प्रदाता श्रीमती सरोजबेन पिरोदिया, पूर्व शिक्षिका श्रीमती जूली पिरोदिया, शिक्षिका श्रीमती सरिता श्रीमाल एवं श्रीमती शीतल कोठारी और बच्चों की जन्मदायिनी माताओं ने उपस्थित रहकर सभी बच्चों के इस पुण्यशाली कार्य की अनुमोदना की और सभी को आशीर्वाद दिया ।
हर्ष हर्ष – जय जय और आचार्य भगवन की जय जयकार के नारों से जब आभामंडल गुंजित हो रहा था, तो वह कोई मामूली स्वर नहीं था वह पूरे अंतरिक्ष में एक नई भावना के संचार का उद्घोष था। उपरोक्त जानकारी साधुमार्गी जैन संघ के उपाध्यक्ष प्रितेश गादिया ने दी।

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