रतलाम 25 जुलाई। संत उपदेश देते है, प्रेरणा देते है, आग्रह अथवा आदेश नहीं करते। साधना ही आपको ज्ञान, दर्शन, चारित्र एवं तप की और ले जाती है आगे भी बढाती है। इसलिए तप, जप, सामायिक, प्रतिक्रमण के लिए मन को तैयार करे। चातुर्मास में सभी ज्ञान, दर्शन एवं चारित्र की आराधना का लक्ष्य रखे।
यह बात रत्नपुरी के रत्न श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कही। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में शुक्रवार सुबह प्रवचन देते हुए मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य प्रवर्तकश्री ने कहा कि सबको इतना सुंदर जीवन मिला, जिनवाणी और सदगुरू मिले है। इसलिए इनका सदुपयोग कर अधिक से अधिक साधना करे। इससे जीवन निर्मल बनेगा। उन्होंने कहा कि जैसे अलमारी में कचरा नहीं रखा जाता, अपितु बहुमूल्य वस्तुए रखी जाती है, वैसे ही दिमाग भी कीमती है, इसमें भी कचरा नहीं भरे और सदविचारों को ही स्थान देना चाहिए।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि दृष्टि निर्मल होनी चाहिए। यदि दृष्टि निर्मल हो, तो रेत में भी मोती ढूंढा जा सकता है, लेकिन दृष्टि विपरीत हो, तो अच्छाई में भी बुराई ही नजर आती हैं। निर्मल दृष्टि से ही आत्मा में भी परमात्मा को देखा जा सकता है। प्रवर्तकश्री ने बोधि का महत्व समझाया और कहा कि सम्यक ज्ञान बोधि वाले को ही होता है। बोधि के बिना मोक्ष का द्वार नहीं खुलता। सम्यत्व होगा, तो ज्ञान, दर्शन और चारित्र भी रहेंगे।
प्रवचन के आरंभ में जाप किए गए। प्रवर्तकश्री ने कई तपस्वियों को अलग-अलग तप आराधना के प्रत्याख्यान कराए। इस दौरान सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8 एवं महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा सहित श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। संचालन श्री संघ के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश मूणत ने किया।