स्व. अनुपकुमारी दख ने नेत्रदान के माध्यम से दी अमर रोशनी

दो नेत्रहीनों के जीवन में जलेगा आशा का दीप

रतलाम। कहते हैं कि जीवन भले ही समाप्त हो जाए, लेकिन अच्छे कर्म अमर हो जाते हैं। शहर के नाहरपुरा निवासी स्व. अनुपकुमारी दख के देहावसान के पश्चात उनके परिवारजनों ने संवेदनशीलता और मानवता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेत्रदान का निर्णय लिया। उनके इस महान निर्णय से दो नेत्रहीन व्यक्तियों को नई दृष्टि और नया जीवन मिलने की राह प्रशस्त हुई है।
परिवार की ओर से तेरापंथ युवक परिषद को नेत्रदान की सूचना दी गई तथा पारिवारिक जन की सहमति से यह पुनीत कार्य सम्पन्न हुआ। परिषद के समन्वय से रतलाम स्थित डा. लक्ष्मीनारायण पांडे मेडिकल कॉलेज आई बैंक की टीम पहुँची और विधिवत नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की।
परिषद अध्यक्ष मयूर गांधी ने बताया कि इस कार्य में मेडिकल कॉलेज डीन डा. अनिता मुथा को सूचित किया गया। जिनके निर्देश पर नेत्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रिशेन्द्र सिसोदिया के नेतृत्व में नर्सिंग ऑफिसर विनोद कुशवाह, राजवंत जी आदि आई बैंक टीम द्वारा मृतात्मा का कार्निया लिया एवं उनकी टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस अवसर पर अनोखीलाल दख, अशोक दख, अनिल दख, अंतिम दख, अरविंद दख, आनंदीलाल दख, ललित दख, पियूष दख, पुनीत भंडारी, अभिनव बरमेचा, सुनील बोहरा, देवेंद्र मेहता, गौतम वोहरा, संजय पालरेचा, रवि दख, प्रवीण कोठारी आदि परिवारजन सहित उपस्थित रहे। सभी ने दिवंगत आत्मा को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए परिवार के इस साहसिक और समाजोपयोगी निर्णय की सराहना की।
परिषद ने कहा कि नेत्रदान महादान है — यह किसी के अंधकारमय जीवन में प्रकाश भरने का माध्यम है। यदि प्रत्येक परिवार इस दिशा में जागरूकता दिखाए, तो समाज से अंधत्व की पीड़ा को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
अंत में परिषद ने शहरवासियों से अपील की कि वे नेत्रदान के प्रति जागरूक बनें और अपने परिवार में भी इस विषय पर सकारात्मक चर्चा करें, ताकि मृत्यु के पश्चात भी हमारा जीवन किसी और के लिए प्रकाश का कारण बन सके।

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