रतलाम 01 अगस्त। कर्म चाहे अच्छे हो या बुरे, दोनों ही लौटकर आते हैं। दोनों ही सैकड़ो गुना, हजारों गुना और कई बार लाखों गुना लौटकर आते हैं। कर्मों से डरो, ईश्वर से नहीं, ईश्वर माफ कर देते है, लेकिन कर्म कभी माफ नहीं करते।
इन उदगारों के साथ रत्नपुरी के रत्न श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कर्म सिद्धांतों की पे्ररक व्याख्या की। मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में शनिवार सुबह प्रवचन देते हुए प्रवर्तकश्री ने कहा कि जीवन में सदैव सहयोग का भाव रखों यदि आपने किसी बालक-बालिका को पढ़ाई में सहयोग किया, तो भविष्य में बहुत आश्चर्य वाली घटना हो सकती है। कई बार छोटा सा सहयोग बहुत बड़े रूप में लौट कर आता है और विपत्ति में सहयोग मिल जाता है।
उन्होंने मारवाड़ के गांव की घटना बताते हुए कहा कि ग्राम के कुछ श्रावक स्थानक के पास की सरकारी जमीन प्राप्त करने के लिए नागौर पहुंचे थे। उन्हें जिस अधिकारी से जमीन आवंटित कराना थी, उसके कक्ष में जब पहुंचे, तो वह अधिकारी खड़ा हो गया। ग्राम के श्रावकों को इस पर बड़ा आश्चर्य हुआ। अधिकारी ने सम्मानपूर्वक बिठाने के बाद चाय-नाश्ता भी करवाया, तो श्रावक असंमजस में पड गए, उस अधिकारी ने तब बताया कि मुझे पहचाना नहीं। 20 साल पहले साफ-सफाई वाली महिला के साथ 7-8 वर्ष का बच्चा आपके घर आता था और आपके घर की महिलाएं कभी मिठाई तो कभी खिलौना दे देती थी। वो बालक मैं ही हूं, मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं। श्रावकों ने जमीन आवंटन की बात कही, तो उस अधिकारी ने तुरंत अपने निज सहायक को बुलाकर सारा काम करवा दिया। एक छोटा सा सहयोग का कर्म कितने बड़े रूप में सामने आ सकता है, ये उसका उत्कृष्ठ उदाहरण है।
प्रर्वतकश्री ने कहा कि अच्छाई हमेशा लौटकर आती है। कर्म करते समय इसलिए फल की चिंता और किसी प्रकार की अपेक्षाएं नहीं करनी चाहिए। अच्छे कर्म होंगे, तो फल भी निश्चित अच्छा ही मिलेगा। कर्मों से हर व्यक्ति को डरना चाहिए, क्यों कि बुरे कर्म का नतीजा हमेशा बुरा ही आता है। कर्म सिद्धांत का यही सार है कि हर कर्म लोटकर आता है, इसलिए भगवान से डरने के बजाए कर्म से डरना चाहिए। आरंभ में सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा ने संबोधित किया। इस अवसर पर प्रवर्तकश्री से कई तपस्वियों ने तप आराधना के प्रत्याख्यान लिए। संचालन चातुर्मास समिति के मंत्री रखब चत्तर ने किया। श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे।