धर्म को जिया जाता है, किया नहीं जाता- श्रमण संघीय प्रर्वतक श्री प्रकाशमुनिजी मसा

रतलाम, 03 अगस्त। धर्म की क्रियाएं तो करो, लेकिन धर्म में जिए नहीं, तो ऐसा धर्म किसी काम नहीं आता। धर्म को जिया जाता है, किया नहीं जाता। शांति में, क्षमा में, सरलता में जीना धर्म है। धर्म में जीने वाले के मन और मस्तिष्क अधीन रहता है। वर्तमान में लोग दुनिया को साधते है, लेकिन मन को नहीं साधते। मन को साधने वाला गुरू और मन पर नियंत्रण कर ले, वह सदगुरू है।
यह बात मालव केसरी पूज्य गुरुदेव सौभाग्यमल जी मसा के सुशिष्य, रत्नपुरी के रत्न, श्रमण संघीय प्रवर्तक पूज्य श्री प्रकाश मुनिजी मसा निर्भय ने कही। सोमवार सुबह मोहन टाकीज स्थित श्री सौभाग्य प्रकाश दरबार में प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि क्रिया धर्म का साधन है, धर्म नहीं है। धर्म को जीना नहीं सीखा, तो क्रिया कोई मायने नहीं रखती। समर्पण से साधना में बल आता है। एक साधे, सब सधे अर्थात जिसने मन को साध लिया, वह सबको साध लेता है। धर्म उसी को उपलब्ध होता है, जो आत्म तत्व को जान लेता है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि मन को साधना साध्य है। मालव केसरी पूज्य गुरुदेव ने मन को साधा था। वे मन का अध्ययन करने और क्रोध आने पर उसे निश्फल करने पर जोर देते थे। गुरूदेव का मिलना उनका सौभाग्य रहा। क्रोध, लोभ, मान माया, राग-द्वेष जीतना ही सच्ची साधना है, जिसे ये मिल जाए, उसके चेहरे पर सदैव सौम्यता, प्रसन्नता दिखाई देती है। उपसर्ग मे आए महावीर देव की भी प्रसन्नता कायम रही थी और यही महापुरूषों की पहचान है।
प्रवर्तकश्री ने कहा कि मन आत्मा के पर्याय के साथ बदलता है और आत्मा के पर्याय प्रतिक्षण बदलते रहते है, जिसका असर मन पर होता है। देह अलग है और आत्मा अलग है, ये ज्ञान जिसकों हो जाता है और देह एवं आत्मा के भेद जान लेता है, वहीं आत्मा से परमात्मा बन सकता है। आत्म तत्व सत्य है। आत्मा में जियो। सुबह उठते ही शरीर की चिंता के बजाए आत्मा की चिंता करों, तो आत्म कल्याण की और बढोगे, अन्यथा संसार में ही विचरण करते रह जाओगे।
आरंभ में उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ने संबोधित किया। इस अवसर पर कई तपस्वियों ने प्रवर्तकश्री से अलग-अलग तप आराधना के प्रत्याख्यान लिए। प्रवचन के दौरान सेवाभावी श्री दर्शनमुनिजी मसा, उपप्रर्वतनी, महासती, प्रवचन प्रभाविका श्री सुमनप्रभाजी मसा ठाणा-8 एवं महासती श्री चंदनबालाजी मसा एवं सेवाभावी श्री कल्पनाजी मसा मंचासीन रहे। संचालन चातुर्मास समिति के मंत्री रखब चत्तर ने किया। इस दौरान श्री धर्मदास जैन श्री संघ सदस्यगण, श्री धर्मदास जैन मित्र मंडल ट्रस्ट, श्री सौभाग्य तीर्थ ट्रस्ट, श्री सौभाग्य जैन नवयुवक मंडल, श्री सौभाग्य प्रकाश युवक मंडल, श्री सौभाग्य जैन महिला मंडल, श्री सौभाग्य अणु बहु मंडल एवं श्री सौभाग्य प्रकाश बालक-बालिका मंडल के सदस्यगण उपस्थित रहे। गुरूदेव की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में आयोजित 11 दिवसीय श्री सौभाग्य चालीसा जाप में सोमवार को 500 से अधिक श्राविकाएं शामिल हुई।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Play sound