
मैसूरुl 5 अगस्त l स्थानकवासी जैन संघ हल्लदकेरी के तत्वावधान जैन स्थानक भवन में आयोजित धर्मसभा में राष्ट्रसंत कमल मुनि कमलेश ने कहा कि चाहे कितनी भी कठोर साधना कर ले, ग्रंथ का अध्ययन कर ले, यहां तक संत भी बन जाए तो भी विनय के अभाव में प्राप्त किया हुआ ज्ञान वरदान के स्थान पर अभिशाप बनेगा l संत ने कहा सभी धर्म का मूल साधना का मार्ग विनय प्रशस्त करता है l विनय ही धर्म है l विनय ही मोक्ष है l विनय ही आत्मा को परमात्मा के रूप में परिवर्तित करता है l संत ने कहा अविनय अपने आप में अभिशाप है l धर्म साधना उपासना भी उसके लिए विनाश का कारण बनेगी l वह किसी के दिल को नहीं जीत सकता l लोकप्रिय नहीं बन सकता है l
मुनि कमलेश ने कहा विनय की उर्वरा भूमि में धर्म का बीज पुष्पित और पल्लवित होकर अनंत गुना ज्यादा फलदाई बनता है l अंतःकरण से विनय पूर्वक परमात्मा के चरणों में निस्वार्थ भाव से आत्म कल्याण के लिए समर्पित हो जाता है l वह स्वयं परमात्मा के रूप में परिवर्तित हो जाता है l गुरु हमारा कल्याण नहीं करेंगे, वह तो सबको सम्मान रूप से ज्ञान प्रदान करते हैं, परंतु विनय वाले के लिए अमृत का काम करेगा l अविनय वाले के लिए जहर का काम करेगा l उसको धर्म के लिए भगवान ने अयोग्य बताया है l गुरु और महापुरुष के प्रति विनय भाव हमारी आत्मा का जन्म जन्मांतर तक कल्याण करेगा l
विनयवान को सम्यक ज्ञान की प्राप्ति होती है l जहां विनय है, वहां करुणा सरलता प्रेम सद्भाव का आत्मा में अपने आप संचार हो जाता है l अखिल भारतीय जैन दिवाकर विचार मंच नई दिल्ली शाखा मध्य प्रदेश के 50 कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधिमंडल 7 से 9 अगस्त तक के चिंतन शिविर में भाग लेने हेतु मैसूरु पहुंचा है l पंजाब और कोलकाता के दिवाकर मंच के पवन जैन रोपड़, विमल भंडारी, कोलकाता कार्यकर्ताओं ने विचार व्यक्त किया l अध्यक्ष सुभाष दरड़ा, राजेंद्र मखाना, गौतम सांखला, प्रकाश मुथा, उमेश कोठारी, मीठालाल गांधी, किरण पटवा ने अतिथियों का स्वागत किया l मंत्री बुधमल बागमार ने संचालन किया l